
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
पटना: बिहार के लिये महागठबंधन के लिये मुख्यमंत्री पद के नाम पर तेजस्वी यादव की घोषणा हुई लेकिन अब सबसे अधिक चर्चा मुकेश सहनी की हो रही है। लेागों को यकीन ही नहीं हो रहा कि आखिर केवल 15 सीटों पर लड़नेवाले कैसे उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगें जबकि कांग्रेस और भाकपा माले के अधिक सीटों पर लड़ने के वावजूद उनके कोटे में उपमुख्यमंत्री पद नहीं आ पाया। बिहार की सियासत में शुरुआत तो तेजस्वी यादव के नाम की घोषणा से होनी थी, लेकिन दोपहर तक सुर्खियों में आ गए मुकेश सहनी। पटना के होटल मौर्य में हुई महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले जो कुछ हुआ, उसने पूरे राजनीतिक समीकरण को पलट दिया। सूत्रों के मुताबिक़, सुबह 11.30 बजे तेजस्वी यादव को आधिकारिक तौर पर महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाना था। लेकिन कार्यक्रम से कुछ ही समय पहले विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने साफ़ शब्दों में कहा – “अगर तेजस्वी चेहरा होंगे, तो मैं डिप्टी सीएम बनूंगा।” सहनी होटल मौर्य के एक सुइट में ठहरे थे, जहाँ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और अन्य वाम दलों के नेता भी मौजूद थे। इसी बीच सहनी का यह ‘आख़िरी वक्त का डिमांड’ पूरे गठबंधन के लिए सिरदर्द बन गया। सहनी ने कहा कि उन्होंने कम सीटों (15) पर समझौता इस उम्मीद में किया था कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद मिलेगा। “अगर मुझे यह पद नहीं मिला, तो मैं अपने समर्थकों के बीच कैसे जाऊँ?” कृ यही उनका तर्क था। उनकी इस शर्त से गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ गया। लेकिन जब गहलोत ने दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से बात की, तो जवाब मिला – “सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित कर दीजिए, मल्लाह समुदाय का वोट हमारे लिए ज़रूरी है।”
मुकेश सहनी ने बैठक में कहा कि उन्होंने बिहार में पिछड़ों, मल्लाह समाज और मछुआरों के हक की लड़ाई सबसे पहले उठाई है. इसलिए महागठबंधन में उन्हें श्सम्मानजनक स्थानश् मिलना चाहिए। सहनी ने दो टूक कहा, अगर महागठबंधन सामाजिक न्याय की बात करता है, तो हमें सिर्फ सीट नहीं, पद में भी हिस्सेदारी चाहिए। उनके इस बयान ने माहौल को गर्म कर दिया। कई नेता आपस में चर्चा में जुट गए, जबकि आरजेडी नेताओं ने स्थिति को संभालने की कोशिश की।
मौजूद सूत्र बताते हैं कि तेजस्वी यादव ने तत्काल दखल देते हुए सभी नेताओं को शांत किया। तेजस्वी ने कहा कि गठबंधन की ताकत एकता में है और इस वक्त किसी तरह का पद की मांग या बहस गलत संदेश देगा। उन्होंने सहनी को भरोसा दिलाया कि चुनाव के बाद सत्ता आने पर हर दल की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक- सहनी इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने दोहराया कि श्मेरे वोट बैंक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सहनी के इस बयान से कांग्रेस और वाम दलों के नेता भी असहज हो गए। कांग्रेस और वामदलों ने संकेत दिया कि उपमुख्यमंत्री पद का सवाल अभी पूर्व-निर्धारित एजेंडा नहीं है, इसलिए इस पर कोई फैसला चुनाव से पहले संभव नहीं।
