मुखर संवाद के लिये प्रमिला यादव की रिपोर्टः-
नयी दिल्ली:
पीएफआई का भंडाफोड़ करने वाली एनआईए की कार्रवाई को आपरेशन आक्टोपस नाम दिया गया। इसके तह 22 सितंबर को एनआईए ने 11 राज्यों में पीएफआई के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 106 पीएफआई के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया । यह छापेमारी एनआईए और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट जारी की जिसमें दावा किया है कि इस्लामिक आतंकी संगठन पापुलर फ्रंट आफ इंडिया के देशभर में फैले आफिस पर छापेमारी की गई। इस दौरान जब्त कागजातों से आपत्तिजनक सामग्री मिली है। एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश की गई रिमांड रिपोर्ट में 10 लोगों की हिरासत की मांग की गई है। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि कट्टर इस्लामिक संगठन ने युवाओं को आतंकी गुट में शामिल होने के लिए भड़काया। इन आतंकी गुटों में लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड सीरिया भी शामिल हैं। एनआईए ने कहा है कि पीएफआई के परिसरों में छापेमारी को आपरेशन आक्टोपस नाम दिया गया था जिसमें कुल 300 अधिकारी शामिल थे। इन्हें छापेमारी के दौरान शांत रहने को कहा गया था। इस आपरेशन में पीएफआई के 100 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था और करीब 200 को हिरासत में लिया गया था।
एनआईए के अनुसार पीएफआई के सदस्य देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। एनआईए द्वारा दर्ज किए गए पांच मामलों के बाद यह कार्रवाई की गई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी टेरर फंडिंग, युवाओं के लिए ट्रेनिंग कैंप और लोगों के बीच कट्टरता फैलाने का काम हो रहा हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि कालेज प्रोफेसर का हाथ काटने जैसा आपराधिक हिंसक कार्रवाईयों को च्थ्प् द्वारा अंजाम दिया जाता रहा है।महाराष्ट्र में इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ने अलर्ट जारी किया था जिसके मुताबिक पापुलर फ्रंट आफ इंडिया एक ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहा है। जिसके लिए औरंगाबाद और जालना में इस संगठन में सदस्यों की भर्ती की जा रही है।इस छापेमारी के दौरान सबसे अधिक गिरफ्तारियां केरल में की गई। यहां 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक में 20-20, तमिलनाडु में 10, असम में 9, उत्तर प्रदेश में 8, आंध्र प्रदेश में 5, मध्य प्रदेश में 4, पुडुचेरी और दिल्ली में तीन-तीन और राजस्थान में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
