जमुई में त्रिकोणीय संघर्ष के चक्रव्यूह में फंसी अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाज श्रेयसी सिंह ,तीरंदाज की राह नहीं है आसां

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जमुई से शिवांगी यादव की रिपोर्टः-

जमुई : लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान के लोकसभा क्षेत्र में अंर्राष्ट्रीय तीरंदाज की राहें काफी कठिन दिखाई दे रही है। जमुई में नाम के लड़ाई में फंस चुकी हैं श्रेयसी सिंह। जमुई से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की पुत्री और इंटरनेशनल शूटर श्रेयसी सिंह को भाजपा ने उतारा है। जयप्रकाश नारायण यादव के छोटे भाई और वर्तमान विधायक विजय प्रकाश को राजद ने यहां से उम्मीदवार बनाया है। वह यहां के सिटिंग विधायक भी हैं। वहीं, रालोसपा ने पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र अजय प्रताप को प्रत्याशी बनाया है। जमुई विधानसभा सीट पर राजद नेता जयप्रकाश नारायण यादव और पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह का दबदबा रहा है। 2015 के चुनाव में नरेंद्र सिंह के पुत्र अजय प्रताप को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था। उन्हें जयप्रकाश नारायण यादव के छोटे भाई राजद प्रत्याशी विजय प्रकाश ने पराजित कर दिया था। इस बारा भाजपा ने अजय प्रताप की जगह श्रेयसी सिंह को मैदान में उतारा है। टिकट कटने से नाराज अजय प्रताप ने रोलोसपा का हाथ थाम लिया और मैदान में उतर गए। इससे यहां त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है।जमुई विधानसभा क्षेत्र में इस बार 293587 मतदाता हैं। इनमें से 155785 पुरुष और 137194 महिला मतदाता हैं। इनके लिए इस बार 436 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। यहां चरण में 28 अक्टूबर को मतदान होना है।स सीट पर सबसे पहला चुनाव 1957 में सीपीआइ के भोला मांझी ने चुनाव जीता था। इसके बाद 1962 के चुनाव में कांग्रेस के गुरु राम दास जीते। इसके बाद त्रिपुरारी प्रसाद सिंह चार बार लगातार विधायक रहे। 1980 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी हरदेव प्रसाद जीतने में कामयाब हुआ। 1985 और 1990 के चुनाव में कांग्रेस के सुशील कुमार सिंह जीते। 1995 में जनता दल का खाता खुला और अर्जुन मंडल जीते।

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