मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
रांची:
(जेबीकेएसएस) के अघ्यक्ष जयराम महतो ने अपनी पार्टी को विधानसभा चुनाव में पूरी तरह से तैयारी के साथ उतरेंगे। जयराम महतो की ओर से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को पूरी तरह से कसौटी पर कसने के बाद ही चुनावी मैदान में उतारेंगे। पचास से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने के लिये जयराम महतो अपनी पार्टी के प्रत्याशियों का साक्षात्कार लेंगें। वहीं उनकी पार्टी से टिकट पाने के लिये कम से कम स्नातक की शिक्षा प्राप्त करना जरूरी होगा। लोकसभा चुनाव में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करानेवाली पार्टी झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) ने विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। राज्य की 81 में 50 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है। लोकसभा चुनाव में जेबीकेएसएस के प्रदर्शन को देखते हुए विधानसभा चुनाव के टिकट के दावेदारों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। इसके मद्देनजर जेबीकेएसएस सुप्रीमो जयराम महतो ने टिकट के लिए मापदंड तय किए हैं।इस बीच जेबीकेएसएस की धनबाद कमेटी का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इसे लेकर दस जुलाई को गीता रानी पैलेस भेलाटांड़ में बैठक होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उम्मीदवारों के लिए मापदंड भी तय किए हैं। इसके अनुसार, उम्मीदवारों को अंक दिए जाएंगे। जिसका सबसे अधिक अंक होगा और मापदंड पर खरा उतरेगा, उसे जिला कमेटी में जगह मिलेगी। इसमें धनबाद जिलाध्यक्ष की भी घोषणा हो सकती है। लगभग दो वर्ष पुरानी यह पार्टी उत्तरी छोटानागपुर के साथ कोल्हान में भी अपने पांव पसार चुकी है। इसकी नजर इस बार के विधानसभा के चुनावों पर है। इसमें टुंडी, बाघमारा, सिंदरी, चंदनकियारी, डुमरी, बोकारो, रामगढ़, मांडू, सिल्ली, ईचागढ़, बड़कागांव, हजारीबाग सदर महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पर जेबीकेएसएस अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जोर लगा रही है। जयराम महतो अब राज्य की सिसायत में जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं. जब जयराम महतो ने खुद को और अपने कैडर को लोकसभा चुनावी समर में उतरने का फैसला लिया, तो राजनीति के जानकार इसे उनका बचपना और राजनीतिक जल्दबाजी भरा कदम बताया था. मगर जिस प्रकार से खुद जयराम महतो और उनके लोगों ने वोट हासिल की, उससे राज्य की राजनीति में हलचल मचा गयी.
जयराम महतो के बारे में यह कहा जा रहा था कि जिस कदर उनकी सभा में युवाओं की भीड़ उमड़ती थी क्या, वह वोट में तब्दील हो पाएगा, उन्होंने इस मिथ्या को सही साबित कर दिया. जयराम और उनका संगठन झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) ने झारखंड की राजनीति में खुद को स्थापित करते हुए लोहा मनवा लिया. अब जयराम महतो दूर की रणनीति बनाने में जुट गए हैं. भले ही उन्होंने घोषणा की है कि उनका संगठन 55 सीट पर अकेले दम पर चुनाव लड़ेगा, मगर सच इससे परे है. जयराम महतो की रणनीति फिलहाल राज्य की राजनीति में नया बड़ा कुरमी नेता बनने की है. इसलिए वे अपनी कोर टीम के साथ झारखंड के कुरमी बहुल करीब नौ सीटों को टारगेट करके अपनी चुनावी रणनीति बना रहे हैं. बहुत जल्द जेबीकेएसएस का पार्टी के तौर पर निबंधन कराने की तैयारी चल रही है.जयराम महतो ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नौ सीटों पर फोकस किया है, जो कुरमी बुहल सीटें हैं। यहां पर कुड़मी वोट ही अंतिम रूप से निर्णायक साबित होता है. इनमें सुदेश महतो की सीट सिल्ली, ईचागढ़, मांडू, रामगढ़, गिरिडीह, डुमरी, गोमिया, हजारीबाग और बाघमारा सीट प्रमुख है। इन नौ सीटों में अधिक अधिक से अपने पाले में करने की रणनीति बनाने में जयराम महतो जुटे हैं।
