
रिपोर्टः- मनीषा यादव
रांची: 37 सालों के बाद इस साल विशेष संयोग बन रहा है।रविवार (सूर्यदेव का दिन), चित्रा नक्षत्र और अमावस्या का अद्भुत और विशेष योग है। इस महासंयोग पर ह्रदय से लक्ष्मी पूजा करने वालों पर मां की कृपा बरसेगी। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी शरीर धारण कर धरती पर आती हैं। इसके बाद देवउठान एकादशी तक वे धरती पर ही रहती हैं। इस क्रम में भक्त माता को प्रसन्न कर सकते हैं। माता लक्ष्मी के दो आसन हैं, कमल और उल्लू। भक्त माता के दोनों रूपों की पूजा करते हैं। कमलासन माता लक्ष्मी भक्तों के घरों में चीर काल तक निवास करती हैं। इस दिन जो भी भक्त हल्दी, लाल कमल, कनकधारा स्त्रोत, और श्री सूक्त से पूजा करते हैं, उनपर मां की कृपा बरसती है। कार्तिक कृष्ण अमावस्या आज अमृतयोग में दीपोत्सव यानी दीपावली मनाई जाएगी। दीपावली शब्द का अर्थ है-दीपा नाम आवली, अर्थात दीपों का समूह। माता लक्ष्मी के निमित सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीपों का समूह, रंगोली आदि बनाकर अपने-अपने घरों को सुशोभित करने के बाद लोग माता लक्ष्मी के आगमन के लिए भगवान गणेश, सरस्वती और कुबेर के साथ भगवती लक्ष्मी का विशेष पूजन-आह्वान करेंगे। इसे शास्त्रों में सुख की रात्रि भी कहा गया है। प्रदोष काल शाम 5ः45 बजे से 7ः45 बजे तक रहेगा। वहीं, खरीदारी भी जोरों पर है। सुबह से ही बाजार में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा के साथ ही पूजा सामाग्री की खरीदारी में जुटे हुए हैं। लक्ष्मी नारायाण मंदिर के सुमंत मिश्र के अनुसार दीपावली में खासकर वृष और सिंह लग्न में माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष फल है। शाम सात बजे से लेकर 8ः40 बजे तक वृष लग्न रहेगा और रात 1ः15 बजे से 3ः30 बजे तक सिंह लग्न रहेगा। ये दोनों मुहुर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। आचार्य निखिलनंद के अनुसार माता लक्ष्मी चंचला होती हैं। इसलिए इनकी पूजा स्थिर लग्न में करनी चाहिए। सुमंत मिश्र कि प्रदोष काल में पूजन व दीया जलाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि दीपावली के प्रदोष काल में जितने जलाए हुए दीपक की संख्या होती है, उतने हजार वर्ष दीये जलाने वाले को स्वर्गलोक में वास मिलता है। बताया कि इस वर्ष दीपावली में अमृत योग दोपहर 12ः23 बजे से अगले दिन सुबह 5ः55 बजे तक है। इस योग में माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख, समृद्धि, धन-संपदा एवं ऐश्वर्य में वृद्धि होगी व माता की असीम कृपा बरसेगी।
