पिछड़ों के बड़े राजनीतिक दल के रूप में झारखंड में आज से स्थापित होगी भाजपा, रघुवर और ताकतवर

Jharkhand झारखण्ड

 रिपोर्टः- अशोक कुमार

रांची: आज से राज्य की राजनीति का स्वरूप ही अलग-अलग दिखाई देगा। राज्य में पिछड़ों के बड़े राजनीतिक दल के रूप में भाजपा स्थापित हो जायेगी। अमूमन भाजपा को सवर्ण विरादरी और पिछड़ों में वैश्यों की जमात राजनीति में मामना जाता है। लेकिन झारखंड में पिछड़ों के रूप में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जब से कमान संभाली है तब से भाजपा को पिछड़ें नेता पसंद आने लगे हैं। राज्य में पिछड़ों की आबादी 55 प्रतिशत है और बड़ी जमात भाजपा के साथ होने के कारण भाजपा का तमुकाबला और भी विपक्ष को मुश्किलों में डालेगा। आज के मिलन समारोह के बाद से भाजपा मंरिपोर्टः- अशोक कुमार रांची: आज से राज्य की राजनीति का स्वरूप ही अलग-अलग दिखाई देगा। राज्य में पिछड़ों के बड़े राजनीतिक दल के रूप में भाजपा स्थापित हो जायेगी। अमूमन भाजपा को सवर्ण विरादरी और पिछड़ों में वैश्यों की जमात राजनीति में मामना जाता है। लेकिन झारखंड में पिछड़ों के रूप में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जब से कमान संभाली है तब से भाजपा को पिछड़ें नेता पसंद आने लगे हैं। राज्य में पिछड़ों की आबादी 55 प्रतिशत है और बड़ी जमात भाजपा के साथ होने के कारण भाजपा का तमुकाबला और भी विपक्ष को मुश्किलों में डालेगा। आज के मिलन समारोह के बाद से भाजपा मं

े रघुवर दास का कद और भी तेजी से बढ़ेगा। रघुवर दास को पिछड़ों के बड़े नेता के रूप में स्थापित करने की मंशा पाले लोगों की रणनीति के कारण आज से पहले से और मजबूत रूप् में दिखाई देंगे रघुवर दास। आज राज्य की राजनीति में विधानसभा चुनाव के पहले बड़ें उलटपलट करनेवाला दिन है। बड़ें फेरबदल के साथ भाजपा आज पहले से और अधिक मजबूत होगी जिसके बाद विपक्ष को और गंभीर रणनीति के साथ मैदान में आने को विवश होना होगा। विधानसभा चुनाव से पूर्व झारखंड की राजनीति मेें बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्षी खेमे में सेंध लगाते हुए झामुमो और कांग्रेस को बड़ा झटका देने की तैयारी मुक्कमल कर ली है। कांग्रेस के विधायक मनोज यादव, सुखदेव भगत और बादल पत्रलेख भाजपा में शामिल होंगे। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के बहरागोड़ा से विधायक कुणाल षाडंगी, मांडू से विधायक जयप्रकाश पटेल का आज ही भाजपा में शामिल हो जायेंगे। चुनाव के ठीक पहले इस महामिलन समारोह को भाजपा ने भव्य बनाने की तैयारी की है। रांची के हरमू मैदान में आयोजित समारोह में ये तमाम नेता अपने-अपने दलों को त्यागकर भाजपाई हो जाएंगे। कांग्रेस और झामुमो के ये तमाम विधायक पिछले एक माह से भाजपा के संपर्क में थे। भाजपा का टिकट मिलने की सौ फीसद गारंटी और मनपसंद सीट से चुनाव लडने का भरोसा मिलने के बाद ही इन्होंने पार्टी में शामिल होने का निर्णय ले लिया है। इन विधायको की मुख्यमंत्री रघुवर दास से कई दौर की बातचीत के बाद शनिवार को इस संबंध में अंतिम सहमति बनी। झामुमो और कांग्रेस के इन विधायकों के विधानसभा चुनाव से ऐन पूर्व पाला बदलने से विपक्ष के गणित गड़बड़ा सकता है। लोहरदगा, बरही, बहरागोड़ा और विशुनपुर ऐसी सीटें हैं, जिन पर विपक्ष अपनी जीत तय मानकर चल रहा था। मांडू विधायक जेपी पटेल को छोड़ दें, तो कांग्रेस और झामुमो तमाम चर्चाओं के बाद भी अपने मौजूदा विधायकों पर भरोसा करके चल रहे थे। जो विधायक कांग्रेस और झामुमो को छोड़कर भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं, उनकी अपनी-अपनी वजहें बताई जा रही हैं। कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत खुलेआम बोल चुके हैं कि लोहरदगा लोकसभा चुनाव में उन्हें हराने का काम रामेश्वर उरांव ने किया, जो अब प्रदेश अध्यक्ष हैं। सुखदेव भागत ने रामेश्वर उरांव का विरोध कांग्रेस के खुले मंच से भी किया था। सुखदेव भगत शुरूआत से ही भाजपा के माइंड के थे। पिछली विधानसभा से ही सुखदेव का रूझान भाजपा के प्रति था और लागतार भाजपा से उनके बेहतर संबंध विधानसभा की कार्यवाहियों में दिखाई दिये हैं। बरही से चार बार से विधायक और कांग्रेस के लिये हजारीबाग प्रमंडल में मजबूत नेता होने के वावजूद हाल के दिनों में कांग्रेस के नेतृत्व से लागातार नाराजगी ही मनोज यादव को भाजपा के पास लेकर गया। बड़े कद्दावार और मजबूत जनाधार वाले नेताहोने के वावजूद भी कांग्रेस ने कभी उनको नेतृत्व नहीं दी। कांग्रेस के अंदर वर्तमान नेतृत्व और पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार से वो काफी नाराज बताये गये। मनोज यादव अध्यक्ष पद के बड़े दावेदार थे और लोकसभा चुनाव में उनके विरोध के बावजूद फ्रेंडली फाइट में राजद को उतार दिया गया। उनके दबाव के वावजूद कांग्रेस नेताओं ने दुहरा चरित्र दिखाने का काम चतरा लोकसभा चुनाव में किया। गठबंधन के वावजूद किसी बड़े नेता ने मनोज यादव के समर्थन में अपनी सभा चतरा लोकसभा में नहीं की। यही नहीं हेमंत सोरेन ने भी राजद के प्रत्याशी सुभाष यादव के लिये अंदर अंदर अपने कार्यकर्ताओं को लगाया जिसके कारण भी हेमंत सोरेन से उनकी नाराजगी बढ़ती गयी और महागठबंधन के नेता के तौर पर हेमंत का चेहरा होने से उनका नाराज होना स्वाभाविक ही था। चमरा लोकसभा चुनाव में टिकट न दिए जाने से पार्टी से खफा थे। वहीं, कुणाल षाडंगी का बैकग्राउंड शुरू से ही भाजपा का रहा है। कुणाल ने विधानसभा के कार्यवाही के दौरान अपना भाजपायी स्वरूप बरकार रखा था। जेपी पटेल को लोकसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने निष्कासित कर दिया था। झामुमा के निष्कासन के साथ ही भाजपा में टिकट मिलने की संभावना के साथ ही जेपी पटेल आज भाजपा का दामन थामंेगें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *