
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
धनबाद में राजनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के करीबी एवं धनबाद के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर झारखंड मुक्ति मोर्चाका दामन थाम लिया है। यह कदम विशेष रूप से नगर निकाय (नगर निगम) चुनाव-2026 से पहले सियासी समीकरणों को बदलने वाला माना जा रहा है। चंद्रशेखर अग्रवाल को बीजेपी ने मेयर पद के लिये समर्थन नहीं दिया, बल्कि धनबाद से संजीव अग्रवाल को पार्टी समर्थित प्रत्याशी घोषित किया गया। इसी वजह से वे नाराज़ होकर बीजेपी से अलग हो गए और झामुमो का दामन थाम लिया। चंद्रशेखर अग्रवाल पहले भी धनबाद से मेयर, सांसद और विधायक पदों के लिये राजनीतिक दावेदारी कर चुके हैं। चन्द्रशेखर अग्रवाल कभी पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के किचन कैबिनेट के प्रमुख सदस्य के रूप में जाने जाते थे। 2015 से लेकर 2019 तक मुख्यमंत्री आवास में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के बेडरूम तक चन्द्रशेखर अग्रवाल का बेरोक टोक प्रवेश होता था। हाल के दिनों में पर्वू मुख्यमंत्री रघुवर दास का बीजेवपी में प्रभाव में कमी आयी है जिसके कारण ही चन्द्रशेखर अग्रवाल को धनबाद के मेयर पद के लिये बीजेपी समर्थित प्रत्याशी के रूप में वह पार्टी की ओर से घोषणा नहीं करवा पाये इसकारण भी चन्द्रशेखर अग्रवाल जैसे नजदीकी व्यक्ति रघुवर दास से अलग राह अपनाने की सोचकर ही दुमका में झामुमो में शामिल हो गये।
झामुमो में शामिल होते ही उन्होंने कहा कि अब वे धनबाद के विकास पर ध्यान देंगे, खासकर नगर निकाय चुनावों के संदर्भ में। झामुमो के लिये यह एक राजनीतिक बढ़त माना जा रहा है, क्योंकि धनबाद जैसे शहर में एक बड़ा चेहरा उनके साथ जुड़ गया है। इससे झामुमो को शहरी राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में मदद मिल सकती है। वहीं, बीजेपी के लिये यह बात आंतरिक असंतोष का संकेत भी मानी जा रही है।
🔸 झामुमो ने अब अग्रवाल को स्थानीय चुनावों में समर्थित प्रत्याशी मानने का संकेत दिया है।
🔸 धनबाद में चुनावी मुकाबला और भी रोचक और प्रतिस्पर्धात्मक होने की संभावना है।
🔸बीजेपी के भीतर भी आंतरिक गुटबाजी और असंतोष की तस्वीर बनी हुई है।
