
नयी दिल्ली: बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा का लंबी बीमारी के बाद आज नई दिल्ली में निधन हो गया। 82 वर्षीय मिश्रा तीन बार बिहार के सीएम रह चुके थे। वह केंद्रीय मंत्री रहे थे। मिश्रा तीन बार कांग्रेस पार्टी में रहते हुए बिहार के सीएम पद पर पहुंचे थे। मिश्रा ने बिहार में कांग्रेस को बुलंदियों पर पहुंचाया था। फिलहाल वह जेडीयू के सदस्य थे। बता दें कि मिश्रा बिहार में 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में भी फंसे थे। 1996 में सामने आए इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव अभी जेल काट रहे हैं। बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा का दिल्ली में निधन हो गया है। वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे। जगन्नाथ मिश्रा के कार्यकाल में बिहार की बेहतरी के लिए कई कदम उठाए गए थे। ये बात अलग है कि चारा घोटाले में उनका नाम सामने आया था और वो कई मुकदमों का सामना कर रहे थे।
राजनीति में आने से पहले वो अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाया करते थे। पढ़ाने के दौरान ही वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और 1975 में बिहार के सीएम के रूप में कार्यभार संभाला। 1980 में वो दूसरी बार बिहार के सीएम बने और तीसरी बार 1989-90 में सीएम बने। इसके अलावा 90 के दशक में केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी। कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने एनसीपी का दामन थामा। जगन्नाथ मिश्रा के बड़े भाई ललित नारायण मिश्रा भी राजनीति में थे और इंदिरा गांधी सरकार में रेलमंत्री के ओहदे पर थे। 30 सितंबर 2013 को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने चारा घोटाले में 44 अन्य लोगों के साथ उन्हें दोषी ठहराया। उन्हें चार साल की जेल और 200,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। जगन्नाथ मिश्रा पर आरोप था कि उन्होंने रांची और डोरंडा के कोषागार से अवैध तरीके से धननिकासी की थी। इस मामले में राजद के अध्यक्ष लालू यादव को भी सजा सुनाई जा चुकी है और वो सजा भुगत रहे हैं। उन्होंने प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू किया था और बाद में बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने। उनकी रुचि राजनीति में बचपन से ही थी। उनके बड़े भाई, ललित नारायण मिश्रा राजनीति में थे और रेल मंत्री थे।
जगन्नाथ मिश्रा विश्वविद्याल में पढ़ाने के दौरान ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। वह 1975 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार उन्हें 1980 में कमान सौंपी गई और आखिरी बार 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वह 90 के दशक के बीच केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी रहे। बिहार में डॉ मिश्रा का नाम बड़े नेताओं के तौर पर जाना जाता है। कांग्रेस छोड़ने के बाद, वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे।
