

मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची : दुनिया भर में हर साल 1.3 करोड़ से अधिक मौतें पर्यावरणीय कारणों से होती हैं। जलवायु संकट मानवता के सामने सबसे बड़ा स्वास्थ्य खतरा है। हमारे राजनीतिक, सामाजिक व व्यवसायिक निर्णय जलवायु और स्वास्थ्य संकट को बढ़ावा दे रहे हैं। ये बाते कुलपति प्रोफेसर गोपाल पाठक ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर कही हैं। महादेवी बिरला नर्सिंग इंस्टिट्यूट एंड टेक्नोलॉजी, रांची में विश्व स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गोपाल पाठक, मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी डॉ प्रदीप वर्मा, कुलसचिव प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, संस्थान की प्रधानाचार्य डॉ सुबानी बाड़ा व प्रशासक सह समन्वयक श्री आशुतोष द्विवेदी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया । उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और स्वच्छता के द्वारा ही स्वास्थ्य समस्या का समाधान किया जा सकता है। अपने संबोधन में प्रधानाचार्य डॉ सुबानी वाडा ने कहा कि हम सबको अपने स्वास्थ्य के साथ अपने समाज के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। किसी भी राष्ट्र निर्माण में स्वस्थ व्यक्ति का होना आवश्यक है। आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि प्राचीन काल में हम सबके जीवन में योग का अमूल्य योगदान हुआ करता था। प्राचीन मनीषा सर्वे संतु निरामया में विश्वास किया करती थी। हम लोग वसुदेव कुटुंबकम का भाव ऐसा सर्व विश्व के हेतु कहा करते थे। विश्व स्वास्थ्य दिवस के बारे में संस्थान की शिक्षिका रागिनी मिश्रा ने विस्तृत रूप से बताया। संस्थान की छात्राएं नमिता कुमारी, विभवारी सिग्निका , नंदिनी कुमारी एवं श्रुति सेंन ठाकुरी ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में धन्यवाद का ज्ञापन अश्रिता तिर्की ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से मिनल श्वेता, प्रतिमा विलूग, निरोलिन कुल्लू प्रफुल्ल बरजो आदि उपस्थित थे।
