
डॉक्टर संजय यादव
रांची : 1 फरवरी दिन रविवार को निर्मला सीतारमण मोदी कार्यकाल में अपना *लगातार 9वा बजट* भारतीय संसद में पेश करने वाली *प्रथम महिला* बनी। इस बजट से देश को काफी उम्मीद है क्योंकि यह बजट *”विकसित भारत 2047″* के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जिसमें आर्थिक सुधारो को आगे बढ़ाने एवं रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि के साथ राजकोषीय अनुशासन के तहत वित्तीय घाटे को कम करने का प्रयास किया गया है। इस बजट में एक मजबूत आर्थिक राष्ट्रवाद की झलक दिखाई देती है जिसमें भारतीय पर्यटन विकास के साथ धार्मिक स्थलों को एक दूसरे से जोड़ने , मूलभूत अधोसंरचना के विकास, हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, अंतर्देशी जलमार्ग, छोटे और कृषि विकास के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम तथा ए.आई. एग्री टूल्स के द्वारा उत्पादकता में वृद्धि, बायोफार्मा एवं स्वास्थ्य सुधार, खेलो इंडिया मिशन को 10 वर्षों तक मजबूती से आगे बढ़ाना, महिलाओं के लिए सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर (SHE) और लगभग हर जिलों में हॉस्टल बनाने कि योजना, भारतीय सेना के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। जोकि दूरदर्शी हैl
इस बजट से मिडिल क्लास को फायदा मिलेगा । जिसमें DAILY NEEDS या रोज़ उपयोग की चीजे सस्ती होगी, विदेश में पढ़ाई करना सस्ता होगा लेकिन शेयर मार्केट को थोड़ा झटका लगा होगा क्योंकि सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स 0.1 से बढ़कर 0.15 हो गया है , टैक्स स्लैब को यथावत रखा गया है। वित्तीय सुधार एवं वित्तीय अनुशासन के द्वारा लोगों में भय का माहौल समाप्त होगा । जिससे कर संग्रह बढ़ेगा , राजकोषीय घाटा काम होगा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अवसर पैदा होंगे , प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होगी तथा यह बजट निर्यात को प्रोत्साहित करने वाला साबित होगा जिससे कुल रोजगार बढ़ेंगा । सूक्ष्म विश्लेषण के बाद देखा जाए तो यह दूरगामी रूप से “आर्थिक राष्ट्रवाद” को मजबूत करने वाला बजट है।
