
सरकारी जमीन पर ही गलत तरीके से कब्जा किया है पूर्व डीजीपी डी.के. पांडे ने रांची: झारखंड में जब कानून के रखवाले ही कानून का गला घेंटने लगे तो कानून से आम जनता क्या उम्मीद कर सकती है। राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने ही जब सरकारी जमीन पर कब्जा करके अपना आशियाना बना लिया हो तो ऐसे में आम आदमी न्याय की गुहार लगाने कहां जायेगा। रांची के कांके अंचल के चामा मौजा स्थित रिंग रोड के पास बन रही पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में पूर्व डीजीपी डीके पांडेय ने अपनी पत्नी पूनम पांडेय के नाम 50.90 डिसमिल सरकारी जमीन खरीदी है। इस जमीन के गैर-मजरुआ होने और इसका गलत म्यूटेशन किए जाने के आरोपों के बाद 1 जून को रांची डीसी राय महिमापत रे द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस जमीन को सरकारी ही पाया है। सिर्फ पूर्व डीजीपी ही नहीं, 17 बड़े लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम चामा मौजा की खाता संख्या 87 में जमीन खरीदी है। सभी का म्यूटेशन हो गया है। जांच कमेटी में शामिल एलआरडीसी मनोज रंजन व कांके सीओ अनिल कुमार ने डीसी को रिपोर्ट सौंप दी है। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद रांची डीसी ने कहा है कि अब इस खाता की जमीन की जमाबंदी रद्द होगी। जहां घर बन गया या बाउंड्री हो गई है, उन्हें नोटिस दिया जाएगा। जांच रिपोर्ट में गैरमजरुआ जमीन की खरीदारी करने और कागजात में छेड़छाड़ कर उसकी रजिस्ट्री और म्यूटेशन कराने की बात सामने आई है। पूर्व डीजीपी डीके पांडेय ने खरीदी गई जमीन पर अवैध तरीके से दो मंजिले मकान का भी निर्माण करा लिया है। मकान का काम अंतिम चरण में है। लेकिन मकान का नक्शा अभी तक पास नहीं कराया गया है। यह क्षेत्र रांची नगर निगम क्षेत्र से बाहर आता है। वहां नक्शा पास करने की जिम्मेवारी आरआरडीए की है, लेकिन आरआरडीए ने उक्त मौजा में किसी भी मकान का नक्शा पास नहीं किया है। क्योंकि मास्टर प्लान में यह गांव छूटा हुआ है। मास्टर प्लान में यह गांव कैसे छूटा इसका जवाब आरआरडीए पदाधिकारियों के पास नहीं है। सरकार द्वारा बनाई गई प्रतिबंधित सूची में उक्त खाता व प्लॉट की जमीन शामिल है। इसके बावजूद तत्कालीन सब रजिस्ट्रार राहुल चैबे ने रजिस्ट्री की। तत्कालीन सीओ प्रभात भूषण ने गलत तरीके से म्यूटेशन करके जमाबंदी कायम की। जांच कमेटी ने रजिस्ट्रार से लेकर सीओ व सत्यापन करने वाले कर्मचारी व सीआई की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। इन पर भी कार्रवाई होगी। जमीन बेचने वाले आमोद कुमार का नाम रजिस्टर-2 में दर्ज है, उसका नाम किस आधार पर आया इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। रजिस्टर-2 के जिस कॉलम में परिवर्तन का पूरा डिटेल व वर्ष अंकित होता है, वहां बस 1073 त् 27 अंकित है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि इस व्यक्ति का नाम रजिस्टर-2 में कब और किस आधार पर अंकित किया गया है। जांच कमेटी में इस तरह से अवैध रूप् से पूर्व डीजीपी डी.के पांडे का जमीन पर कब्जा साबित होना उनपर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटका रहा है।
