सीबीआई लालू प्रसाद यादव के जमानत को लेकर केन्द्र सरकार के इशारे पर कर रही है काम, लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता निभा रही है सीबीआई

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मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
रांची: केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता निभा रही है और लालू यादव को जेल से जमानत पर किसी कीमत पर निकलने नहीं देना चाहती है। सीबीआई पहले लालू प्रसाद यादव की जमानत का सजा आधी पूरी नहीं होने के कारण कर रही थी तो अब लालू प्रसाद यादव को 7-7 साल की अलग अलग सजा होने का दावा कर रही है। सीबीआई के बदलते हुए रूख के कारण एैसा प्रतीत हो रहा है तो सीबीआई केन्द्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है। केन्द्र सरकार की ओर से सीबीआई को निर्देश मिले होंगें कि लालू प्रसाद यादव की जमानत होने न दी जाये। पहले सीबीआई के अधिवक्ता की ओर से गैरहाजिर रहने की बात कहकर सुनवाई की तारीख आगे करवा दी उसके बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सीबीआई ने झारखंड हाई कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सीबीआइ का कहना है कि विशेष अदालत ने लालू यादव को अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल मतलब कुल 14 साल की सजा सुनाई है। ऐसे में आधी सजा काटने का मतलब सात साल की सजा पूरी करने से है। इस लिहाज से लालू प्रसाद को जमानत नहीं दी जा सकती। लालू की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच एजेंसी, सीबीआइ की ओर दाखिल किए गए जवाब में कहा गया है कि रांची की विशेष सीबीआइ अदालत ने चारा घोटाले के दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री राजद अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव को एक धारा में सात साल, और दूसरी धारा में फिर से सात साल की सजा सुनाई है।

इस मामले में निचली अदालत ने अपने लिखित आदेश में यह स्पष्ट किया है कि लालू को दोनों सजाएं दी जानीं हैं। इसमें एक सजा पूरी होने के बाद दूसरी सजा चलाई जानी है। अदालत के आदेश के अनुसार लालू को दुमका कोषागार मामले में कुल 14 साल की सजा सुनाई गई है। ऐसे में इस केस में आधी सजा अवधि सात साल पूरी करने पर ही मानी जाएगी। लालू प्रसाद यादव की ओर से दाखिल की गई जमानत याचिका के औचित्‍य पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ ने अपने जवाब में कहा है कि लालू आखिर किस आधार पर आधी सजा पूरी करने का दावा कर हाई कोर्ट से जमानत मांग रहे हैं।बीते दिन झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआइ से तीन दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा था। कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने तीन दिन के बदले सुनवाई के तुरंत बाद ही अपना जवाब दाखिल कर दिया।

अब इस मामले में 16 अप्रैल को उच्‍च न्‍यायालय में फिर से सुनवाई होगी। इससे पहले अदालत में सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग से शामिल हुए लालू प्रसाद यादव के वकील सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआइ जानबूझकर लालू की जमानत मामले को लटका रही है।उन्‍होंने कहा कि सीबीआइ इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाना चाहती है। क्‍योंकि झारखंड हाई कोर्ट लालू प्रसाद यादव की सजा की कुल अवधि 14 साल के बजाय 7 साल मानकर उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा है। कपिल सिब्‍बल ने कहा कि सीबीआइ की कोशिश है कि लालू प्रसाद यादव किसी सूरत में जेल से बाहर न निकल सकें। लालू प्रसाद की ओर से बार-बार जमानत की याचिका दायर की जा रही है और यह कर्त भी रखा जा रहा है कि जब चारा घोटाले के मामले में सभी राजनेताओं की जमानत हो गयी तो ऐसे में लालू प्रसाद यादव की जमानत को लेकर विरोध क्यों किया जा रहा है।

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