केवल छठ महापर्व में ही नहीं बल्कि भगवान भाष्कर की उपासना प्रतिदिन करनी चाहिये: राज्यपाल

Jharkhand झारखण्ड

रिपोर्ट:- अशोक कुमार

रांची: भगवान भाष्कर की उपासना केवल छठ महापर्व के दिन ही नहीं बल्कि प्रतिदिन करनी चाहिये। भगवान भाष्कर हमारी संस्कृति ही नहीं बल्कि हमारी आस्था से जुड़े हुए है। भगवान भाष्कर की उपासना करने से जीवन में नया संचार का बोध होता है। ये बातें राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू ने राजधानी रांची के हटनिया तालाब में भगवान सूर्य को अघ्र्य देते हुए कही है। वहीं, जमशेदपुर स्थित सिदगोड़ा सूर्य मंदिर छठ घाट पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी अपने पूरे परिवार के साथ भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि भगवान भाष्कर झारखंड में विकास की गति को और तेज करने का आर्शिवाद दें। झारखंड के लोग हमेशा से ही प्रकृति के उपासक रहे हैं और भगवान भाष्कर की उपासना से ही हमें जीवन में शक्ति मिलती है। लोकआस्था के महापर्व छठ को लेकर पूरे राज्य में उत्साह चरम पर रहा। छठव्रतियों व श्रद्धालुओं ने रविवार को उदीयमान भगवान भास्‍कर को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही चार दिनी सूर्योपासना का पर्व छठ संपन्न हो गया। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए अहले सुबह से ही लोगों की भीड़ छठ घाटों पर जुटनी शुरू हो चुकी थी। प्रशाासन की ओर से छठ घाट पर रंग-बिरंगे बल्बों से आकर्षक सजावट के साथ-साथ रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ ही यह महापर्व संपन्‍न हो गया। इसके बाद व्रतियों ने अपने घरों में पारण किया। इससे पहले शनिवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य देने के लिए विभिन्‍न घाटों पर आस्‍था का सैलाब उमड़ पड़ा था। छठ व्रती और उनके परिजनों ने भगवान भास्‍कर को अर्घ्‍य दिया और सुबह के इंतजार के साथ अपने घर वापस लौट गए थे। जबकि कुछ व्रती, जिन्होंने मन्नत मांगी थी, घाट पर ही रुके रहे और रविवार की सुबह भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। इसके साथी ही छठ महापर्व के समापन के साथ ही इस वर्ष प्रमुख त्योहारों की कड़ी समाप्त हो गयी है।

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