तीसरे चरण के 309 प्रत्याशियो की किस्मत ईवीएम में हुई कैद, सबसे अधिक सिल्ली में तो सबसे कम रांची में हुआ मतदान

Jharkhand झारखण्ड

रांचीः  लोकतंत्र के महापर्व के तीसरे चरण का मतदान समाप्त हो गया। बिना किसी हिंसा के मतदान समाप्त होने के साथ ही प्रशासन ने राहत की सांसें ली हैं।झारखंड विधानसभा के तीसरे चरण के लिए मतदान की प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही चुनाव मैदान में खड़े 309 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया। सबसे दुखद स्थिति रांची विधानसभा क्षेत्र में जहां अधिकारियों और शहरी मतदाताओं की बेरूखी लोकतंत्र के प्रति दिखी। मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। गुरुवार को इस चरण की 17 विधानसभा सीटों के लिए हुई वोटिंग में कुल 62.35 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। हालांकि विधानसभा चुनाव, 2014 की तुलना में यह 1.67 फीसद कम है। वोटिंग पैटर्न की बात करें तो पिछले दो चरणों की ही तरह इस चरण में भी शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं अधिक मतदान हुआ। सिल्ली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक 76.98 तथा रांची में सबसे कम 49.10 फीसद वोटिंग हुई। हालांकि विधानसभा चुनाव 2014 की तुलना में रांची में इस बार 0.47 फीसद अधिक मतदान हुआ। कांके में भी मतदान फीसद बढ़ा है, लेकिन हटिया में इसमें कमी आई है। सिल्ली में सबसे अधिक मतदान होने के बाद भी पिछले विस चुनाव की अपेक्षा मतदान फीसद में आंशिक कमी आई है। मतदाताओं को जागरूक करने की लाख प्रयासों के बावजूद हजारीबाग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत बढने के बजाय 13.54 फीसद घट गया। विधानसभा चुनाव 2014 में कुल 70.72 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इससे इतर इस बार 57.18 फीसद ही वोटिंग हुई। इस चरण में झाविमो प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, आजसू प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो, राज्य सरकार के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह और शिक्षा मंत्री नीरा यादव समेत 309 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें महिला उम्मीदवारों की संख्या 32 है।
सिल्ली, खिजरी, कोडरमा, बरही, बड़कागांव, मांडू, हजारीबाग, सिमरिया, धनवार, गोमिया, बेरमो, ईचागढ़, रांची, हटिया, कांके, रामगढ़ और बरकट्ठा। 2014 विधानसभा चुनाव में इन 17 सीटों पर 64.02ः वोटिंग हुई थी।  2014 के विधानसभा चुनाव में तीसरे चरण की 17 विधानसभा सीटों में से 10 पर भाजपा ने कब्जा जमाया था और एक सीट आजसू पार्टी को मिली थी। वहीं, दो सीट पर कांग्रेस, तीन पर झामुमो और एक पर भाकपा माले के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। जहां शहरी क्षेत्रों के मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करने से पीछे रह जाते हैं, वहीं दिव्यांग मतदाता दूसरे के लिए प्रेरणा बन रहे है। तीसरे चरण के चुनाव की ही बात करें, तो कुल 17 सीटों पर 88.48 फीसद दिव्यांग मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर दूसरों को प्रेरित करने का काम किया। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कृपानंद झा के अनुसार, इस चरण में कुल 62,912 दिव्यांग मतदाता थे, जिनमें 55,667 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

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