बिहार में किसी कीमत पर एनआरसी नहीं लागू होगा और जातीय जनगणना जारी हो:- नीतिश कुमार

देश बिहार

पटना से मृणालनी यादव
पटना: एनआरसी को लकर अब एनडीए के घटक दलों में ही मतभेद की स्थिति देखने को मिल रही है। जदयू के नेताओं ने पहले भी एनआरसी को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी थी लेकिन अब पूरी तरह से बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार इसके विरोध में खुलकर सामने आये है। नीतिश कुमार अपने अल्पसंख्यक वोटों में बिखराव के डर से एनआरसी को लेकर अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिये सामने आये हैं। बिहार विधानसभा के सत्र के दौरान एनआरसी को लेकर सदन के अंदर नीतिश कुमार ने अपना बयान दिया है। इसके साथ ही लालू प्रसाद यादव के जातीय जनगणना वाले बयान का समर्थन करते हुए जातीय जनगणना की मांग की है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में किसी भी हाल में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी को लागू नहीं किया जाएगा। आज बिहार विधानमंडल के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में एनआरसी लागू करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। जब केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी तब असम के संदर्भ में एनआरसी की बात हुई थी। देश के संदर्भ में एनआरसी की बात तो कभी हुई ही नहीं। नीतीश कुमार ने आगे कहा कि देश में एनआरसी लागू करने का कोई औचित्य ही नहीं है। एनआरसी के विषय पर प्रधानमंत्री मोदी भी साफ-साफ अपनी बात रख चुके हैं। ऐसे में एनआरसी पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एक बार जातीय आधारित जनगणना होनी चाहिए। नीतीश ने कहा कि 1930 में आखिरी बार जातीय आधारित जनगणना हुई थी। 2010 में जनगणना के साथ ही जातियों की भी गणना की मांग उठी थी। धर्म के आधार पर तो जनगणना हो जाती है लेकिन जातियों के बारे में तथ्य सामने नहीं आ पाते। हम केंद्र सरकार को अपनी राय देंगे। जातीय आधारित जनगणना में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। नीतीश ने यह भी कहा कि इन दिनों जनगणना पर बहस छिड़ी हुई है। 2010 में जो नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर हुआ था उस पर राज्य सरकार ने पहले ही सहमति दे दी। लेकिन, अब यह बात सामने आ रही है कि एनपीआर में अन्य चीजों के बारे में भी पूछा जा रहा है। इस मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। हम हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं। नागरिकता कानून यानी सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर जदयू में दो फाड़ जैसी स्थिति है। उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर जहां सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। वहीं पार्टी के दूसरे नेता सीएए के पक्ष में हैं। रविवार को प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा था कि बिहार में सीएए और एनआरसी लागू नहीं होगा। जबकि जदयू महासचिव आरसीपी सिंह ने कहा कि लोगों को सीएए और एनआरसी से डरने की जरूरत नहीं है। सीएए को लेकर कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। ये कानून नागरिकता देने वाला है, किसी का अधिकार छीनने वाला नहीं। एनआरसी पर आरसीपी सिंह ने यह भी कहा कि जो अभी आया ही नहीं उसका विरोध समझ से परे है। वहीं जातीय जनगणना की मांग को अब पिछड़े वोटो की जुगाड़ करनेवाला बयान विरोधी दल के नेता कर रहे हैं। लालू प्रसाद यादव ने पिछड़ो और दलितो की जनसंख्या को देखते हुए जातीय जनलगणना की मांग की थी जिसे आज नीतिश कुमार भी समर्थन देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

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