राजेन्द्र सिंह को मंत्री बनाने के लिये बढ़ रहा है दबाव, पहले क्षत्रिय महासभा अब इंटक के जरिये मंत्री बनाने की रणनीति

Jharkhand झारखण्ड

रांची से अशोक कुमार की रिपोर्ट:-
रांची: कांग्रेस के बेरमो से विधायक राजेन्द्र सिंह को मंत्री बनाने के लिये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी दबाव बनाने की रणनीति बनायी गयी है। पहले क्षत्रिय महासभा की ओर से राजेन्द्र सिंह को मंत्री नहीं बनाये जाने पर हेमंत सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है। तो वहीं इंटक की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मजदूरों के हित में राजेन्द्र सिंह को मंत्री बनाये जाने को लेकर तर्क रखे जा रहे हैं। इंटक के अध्यक्ष जी. संजीवारेड्डी की ओर से कहा गया है कि राजेन्द्र सिंह इस बार अंतिम बार जनता की सेवा करने का मौका चाहते हैं इसलिये उनको मजदूरों के हित में मंत्री बनाया जाये। रांची के प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस काॅफ्रेंस में कहा गया हकि हेमंत सोरेन की सरकार ने एक भी क्षत्रिय विधायक को मंत्री नहीं बनाया है जिसका खामियाजा झारखंड के साथ ही बिहार में भी भुगतना पड़ेगा। फिलहाल हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक मंत्री का पद खाली है। मंत्रिमंडल में एक और मंत्री को शामिल किया जा सकता है। इसे देखते हुए कांग्रेस के विधायकों में जोर आजमाइश शुरू हो गई है। कांग्रेस के दिग्गज राजेंद्र प्रसाद सिंह मंत्री बनने के लिए जोर लगा रहे हैं। उनके लिए इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। यह पत्र सार्वजनिक हो गया है। इसे लेकर झारखंड कांग्रेस के अंदरखाने शहमात की राजनीति तेज हो गई है। झारखंड विधानसभा चुनाव- 2019 में झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की जीत के बाद हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर, 2019 को हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ कांग्रेस के आलमगीर आलम और रामेश्वर उरांव तथा राजद के सत्यानंद भोक्ता ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद से ही मंत्री पद हासिल करने के लिए कांग्रेस के विधायकों में होड़ लगी थी। सब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह को साधने में जुटे थे। लेकिन, कांग्रेस के सिर्फ दो विधायकों को ही सफलता मिली। 28 जनवरी, 2020 को मंत्रिमंडल विस्तार में जमशेदपुर के विधायक बन्ना गुप्ता और जरमुंडी के विधायक बादल पत्रलेख को मंत्री बनाया गया। झारखंड में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। इनमें चार को मंत्री पद मिल चुका है। 28 जनवरी को मंत्रिमंडल का विस्तार था। बेरमो के कांग्रेस विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह को उम्मीद थी कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। लेकिन, मंत्रिमंडल से उनका पत्ता साफ हो गया। चूंकि, नियमानुसार मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल में अधिकतम 12 सदस्य रह सकते हैं। विस्तार के बाद 11 सदस्य हैं। एक बर्थ खाली है। इसी लिए अब जोर आजमाइश हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार के अगले दिन 29 जनवरी को इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी ने राजेंद्र सिंह को मंत्री बनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा। संजीवा ने पत्र लिखकर कहा कि राजेंद्र सिंह 25 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीते हैं। यह उनकी सक्रिय राजनीति में अंतिम पारी है, इस कारण उन्हें जनता की सेवा का मौका दिया जाना चाहिए। वे अगली बार दावा नहीं करेंगे। ऐसे में जब संभावना जतायी जा रही है कि कांग्रेस झारखंड विकास मोर्चा के दो विधायकों प्रदीप यादव और बंधू तिर्की में से किसी एक को मंत्री बनाया जायेगा जो लजल्द ही कांग्रेस में शामिल होंगें। लेकिन राजेन्द्र सिंह लगातार मंत्री बनने के लिये दबाव की राजनीति झारखंड की राजनीति में कोई नया गुल खिला सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *