

मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
रांची: हेमंत सरकार को अस्थिर करने का नहीं बल्कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव का आरोप लगता है सही हो रहा है। लेकिन यह साजिश हेमंत सारकार के विरोध में नहीं बल्कि रामेश्वर उरांव के विरोध में हैं। ंयह लड़ाई दिल्ली दरबार तक पहुंच चुका है। राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू ने इसकी कमान संभाली है। कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और उमाशंकर अकेला के साथ धीरज साहू झारखंड की प्रदेश ईकाई के खिलाफ शिकायतों का पिटारा लेकर दिल्ली पहुंचे हैं। विक्षुब्ध खेमे में नौ विधायक हैं, जो हेमंत सोरेन सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। तीनों विधायक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और गुलाब नबी आजाद से मुलाकात कर झारखंड लौटे हैं। हालांकि दिल्ली जाने वाले विधायकों ने चुप्पी साध रखी है। विधायकों ने आलाकमान से गुहार लगाई है। कांग्रेस के विधायकों के साथ रवैया ठीक नहीं रहता है। सरकार में मंत्री का एक पद खाली है। झारखंड में हेमंत सरकार की सहयोगी कांग्रेस के विधायकों की महत्वाकांक्षा आसमान पर है। जानकारी के अनुसार , राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू ने फिलहाल सरकार पर दबाव बढ़ाने के मुहिम की कमान संभाली है। उनके नेतृत्व में जामताड़ा के विधायक और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष डा. इरफान अंसारी, बरही के विधायक उमाशंकर अकेला और खिजरी के विधायक राजेश कच्छप ने दिल्ली में सरकार के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा पेश किया। नई दिल्ली में इनकी मुलाकात सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद से हुई। इन विधायकों ने आलाकमान को आगाह किया कि अगर स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो सरकार अस्थिर हो सकती है। इसके साथ ही एक व्यक्ति एक पद को लेकर कांग्रेस के विधायकों ने मोर्चा संभाला है। वही झारखंड प्रदेश कां्रग्रेस के नेता रामेश्वर उरांव को बनाये रखने के लिये लाॅबिंग कर रहे हैं। इस तरह से प्रदेश अध्यक्ष के रूप में रामेश्वर उरांव को हटाने को लकर पूरी तरह से रणनीति बनायी है।
