
मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
पटना: हम पार्टी के अध्यक्ष जीतनराम मांझाी बिहार की सत्ता की चाबी लेकर इस समय घूम रहे हैं। जीतनराम मांझी और वीआईपी के अध्यक्ष सन आॅफ मल्लाह मुकेश सहनी को उप मुख्यमंत्री बनाने की बातें कही जा रही है। विधानसभा चुनाव में 50 फीसदी से अधिक का स्ट्राइक रेट देने वाले हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी हाॅट केक बने हुए हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन बुधवार को भाजपा के दो बड़े नेता उनसे मिलने उनके सरकारी आवास जा पहुंचे। दिन में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय मांझी और शाम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल। दोनों नेताओं ने मांझी से बंद कमरे में मुलाकात की। पार्टी के नेता इसे शिष्टाचार मुलाकात ही बता रहे हैं। दोनों भाजपा नेताओं की मुताकात के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। एनडीए को चुनाव में स्पष्ट बहुमत तो मिला है, लेकिन जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हुई तो भाजपा खेमे के लिए अपने सहयोगियों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी। जीतनराम मांझी की पार्टी को इस बार एनडीए कोटे से सात सीटें मिली थीं, जिनमें से चार पर मांझी और उनके प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। हालांकि, मांझी की पार्टी से कितने मंत्री होंगे फिलहाल यह तस्वीर साफ नहीं है। वहीं मांझी पर नजरें ईनायत महागठबंधन की ओर से भी किये जाने की बातें आ रही है। दूसरी ओर जीतन राम मांझी ने एनडीए की सरकार में मंत्री बनने से इंकार कर दिया है। जीतनराम मांझी ने कहा है कि अ बवह सरकार में मंत्री नहीं बनेंगें क्योंकि वह मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक पंडितों के अनुसार, जीतनराम मांझी की महागठबंधन के नेताओं से भी बातचीत चल रही है। महागठबंधन के नेता उन्हें एनडीए से बड़ा आॅफर भी दे चुके हैं। बिहार चुनाव के नतीजों को आए हुए करीब 24 घंटे बीत चुके हैं लेकिन सरकार बनाने की कवायद अबतक शुरू नहीं हो पाई है। भाजपा को छोड़ दें तो बाकी सभी पार्टियों में चुप्पी है। यहां तक भाजपा का सहयोगी जदयू भी चुप है। क्या राजनीतिक गलियारों की ये चुप्पी बिहार की राजनीति में आने वाले नए तूफान का संकेत है।
बिहार चुनाव परिणाम आंकड़ो के अनुसार,
एनडीए (भाजपा, जदयू,वीआईपी, हम) -125
महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, माकपा) -110
भाजपा-74
जदयू -43
हम-4
वीआईपी-4
राजद-75
कांग्रेस-19
भाकपा माले-12
माकपा-2
लोजपा-1
अन्य-6
निर्दलीय-1
संभावित समीकरण
महागठबंधन-110़वीआईपी-4़हम-4़एआईएमआईएम-5 यानी कुल 123
जिस संभावित सियासी समीकरण के आंकड़े को हम पेश कर रहे हैं इसकी पुष्टि हम नहीं कर रहे, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस तरह की कोशिशें बिहार के राजनीतिक गलियारों में की जा रही हैं। इस समीकरण को तब और बल मिलता है जब हम पिछले 24 घंटे में बिहार की राजनीति में हो रही हलचल और बयान को देखते हैं। शुरुआत मंगलवार की रात करीब 11 बजकर 30 मिनट से करते हैं जब एनडीए को 122वीं सीट पर जीत मिली। इस जीत के साथ ही ये लगभग तय हो गया था की एनडीए बिहार में सबसे बड़ा गठबंधन बन चुका है और वह अब आसानी से सरकार बना सकता है। लेकिन इसके बाद जो हुआ उससे ये लगने लगा कि एनडीए में ऑल इज वेल नहीं है। मतगणना के दिन शाम करीब 7 बजे एक तरफ जहां एनडीए की सीट दर सीट बढ़ती जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के दो बड़े नेता नित्यानंद राय और संजय जायसवाल भाजपा कार्यालय में जमे पत्रकारों से बिना कोई बातचीत किए एक साथ एक गाड़ी में निकले। ये दोनों नेता पहले उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के आवास पर पहुंचे, जहां मंगल पांडेय और बिहार भाजपा प्रभारी भूपेन्द्र यादव पहले से मौजूद थे। यहां इन नेताओं ने करीब 1 घंटे बातचीत की और फिर मंगल पांडेय, सुशील मोदी और भूपेन्द्र यादव एक गाड़ी से सीएम आवास के लिए रवाना हो गए। इस बीच पत्रकार लगातार भाजपा अध्यक्ष से मिलने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर बार ये कहा गया कि पत्रकारों के लिए प्रेस वार्ता आयोजित होगी और तब सारे सवालों का जबाब दिया जाएगा। लेकिन ये समय आया रात के करीब 11 बजे, जब सीएम आवास गए भाजपा के नेता वहां से निकलकर भाजपा कार्यालय पहुंचे। यहां पत्रकारों से भाजपा नेताओं ने बात की, लेकिन इस प्रेस वार्ता में जदयू के किसी नेता ने हिस्सा नहीं लिया। एनडीए में सीटों के तालमेल का जब ऐलान हुआ था तो जदयू की तरफ से खुद नीतीश कुमार उस प्रेस वार्ता में पहुंचे थे, लेकिन जीत पर जदयू के किसी नेता ने भाजपा नेताओं के साथ आकर जश्न नहीं मनाया। बीजेपी और जदययू के अंदर ही अंदर खटास पैदा हो गयी है। जदयू के रनेताओं के अनुसार, लोजपा को भाजपा ने खड़ा कर जदयू की दीवारें हिला दी है। कभी बड़ा भाई वाले भूमिका में रहनेवाले जदयू को छोटा भाई बनने पर विवष कर दिया गया है। इस संदर्भ में जदयू के नेताओं की कई बयानें भी सामने आ चुकी हैं।
जदयू के महासचिव केसी त्यागी के बयान पर विचार कीजिये सब समझ में आयेगा। त्यागी ने अपने बयान में जिन अपनों की बात की है, उसके मायने भाजपा से लगाये जा रहे हैं। जदयू के अंदर लोजपा को भाजपा से मिली छूट को लेकर जबदस्त नाराजगी है। इस नाराजगी को ही सीएम आवास से लेकर जदयू कार्यालय तक फैली चुप्पी की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। दूसरी तरफ हाल के दिनों में नीतीश कुमार के काफी नजदीक दिख रहे जीतन राम मांझी के मंत्री पद को अपने कद से छोटा बताना, उनकी बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा मानी जा रही है। इसी बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा को उनके महागठबंधन की तरफ जाने की वजह बताया जा रहा है, हालांकि हम पार्टी की तरफ से इन संभावनाओं को खारिज किया जा रहा है। फाइनल चुनावी नतीजों के आने के बाद लगातार मीडिया तेजस्वी यादव से इस पर प्रतिक्रिया लेना चाह रहा है, लेकिन तेजस्वी राबड़ी आवास से अबतक निकले ही नहीं। दूसरी तरफ कांग्रेस के बिहार से बाहर बैठे नेता दिग्विजय सिंह नीतीश कुमार को दिल्ली आने और भाजपा से दूरी बनाने की सलाह दे रहे हैं।
