
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची : क्वांटम कम्प्यूटिंग : ए बिगिनिंग ऑफ़ नोवेल ईरे पर सरला बिरला विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित वेविनार संपन्न हुआ जिसमें छात्रों में जबरदस्त जानकारी को लेकर जिज्ञासा दिखाई दी। सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग द्वारा क्वांटम कम्प्यूटिंग : ए बिगिनिंग ऑफ़ नोवेल ईरे शीर्षक पर शनिवार को वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में मुख्य बतौर मुख्य अतिथि बीआईटी मेसरा, रांची के सहायक प्रोफेसर डॉ. कुंतल मुखर्जी ने उक्त विषय अपना व्याख्यान दिया। डॉ. मुखर्जी ने कहा कि भविष्य में तंत्रिका नेटवर्क और एआई क्वांटम कंप्यूटिंग द्वारा नियंत्रित होगा। क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य की तकनीक है। गुगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम आदि सभी इस तकनीक को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसरो ने भी फ्री-स्पेस क्वांटम संचार का परीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि अन्य प्रोग्रामिंग भाषाओं की तरह यह भी बाइनरी नंबरों पर आधारित हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि क्यूसी ऐसी मशीनें हैं जो डेटा को स्टोर करने के लिए क्वांटम भौतिकी के गुणों का उपयोग करती हैं। कार्यक्रम में सरला बिरला विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पार्थ पाल ने स्वागत भाषण दिया। बीटेक की छात्रा अदिति कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन छात्रा गरिमा सुप्रिया ने किया।
सरला बिरला विश्वविद्यालय, के कार्मिक एवं प्रशासनिक प्रबंधक अजय कुमार ने बताया है कि इस अवसर पर कुलपति प्रो गोपाल पाठक, कुलसचिव प्रो विजय कुमार सिंह, प्रो. श्रीधर बी दंडिन, डॉ मेघा सिन्हा, डॉ अमृता सरकार, डॉ संतोष दास, प्रो. आदित्य विक्रम वर्मा, प्रो. मनोरमा, प्रो. केशव सिन्हा, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, श्री आनंद विश्वकर्मा, श्री अमृत कुमार सहित विश्वविद्यालय के छात्र मौजूद थे।
