मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: डॉ. सरला देवी बिरला ने हमेशा छात्रों के चरित्र को ढालने और उन्हें जीवन के मूल्य देने में नैतिक मूल्यों के महत्व को बढ़ावा दिया है। डा. गोपाल पाठक ने सबसे कम भ्रष्ट देशों के रूप में फिनलैंड, डेनमार्क, स्वीडन, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों का उदाहरण दिया। उन्होंने डॉ. सरला देवी बिरला को भी उद्धृत किया जिन्होंने हमेशा छात्रों के चरित्र को ढालने और उन्हें जीवन के मूल्य देने में नैतिक मूल्यों के महत्व को बढ़ावा दिया है। सरला बिरला विश्वविद्यालय के वाणिज्य और प्रबंधन संकाय द्वारा सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर के ओल्ड नर्सिंग बिल्डिंग में सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे रंगोली, वाद-विवाद, भाषण और पेंटिंग प्रतियोगिता के साथ हुई। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में विवि के विद्यार्थियों ने काफी जोश और उत्साह के साथ भाग लिया।
बी. के बिरला ऑडिटोरियम में दिन के 12बजे से अतिथियों के उपस्थिति में सभा का आयोजन किया गया। सीसीएल के मुख्य प्रबंधक (सतर्कता) श्री नवीन झा ने भ्रष्टाचार से बचने के लिए संसाधनों के कुशल उपयोग के महत्व के बारे में चर्चा की। उन्होंने देश से भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने के लिए अपने भीतर से भ्रष्टाचार को दूर करने की जिम्मेदारी के बारे में बताया। उन्होंने सभी स्तरों पर सभी अधिकारियों की ओर से बेईमानी को कम करने में प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई गई भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत भ्रष्टाचार को खत्म करने में काफी तेज गति से आगे बढ़ रहा है, लेकिन हमें अभी भी पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त भारत के उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. गोपाल पाठक ने भ्रष्टाचार को कम करने में शिक्षा प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सबसे कम भ्रष्ट देशों के रूप में फिनलैंड, डेनमार्क, स्वीडन, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों का उदाहरण दिया। उन्होंने डॉ. सरला देवी बिरला को भी उद्धृत किया जिन्होंने हमेशा छात्रों के चरित्र को ढालने और उन्हें जीवन के मूल्य देने में नैतिक मूल्यों के महत्व को बढ़ावा दिया है। प्रो. पाठक ने शिक्षकों द्वारा इस विचार का पालन करने पर जोर दिया ताकि वे इसे अपने छात्रों तक पहुंचा सकें। उन्होंने हमारे जीवन में नैतिक और नैतिक मूल्यों को विकसित करने के लिए भगवद गीता पढ़ने की आवश्यकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संस्था या संगठन के मुखिया को अपने आचरण में नैतिक होना चाहिए, अन्यथा उसके अधिकारियों में बेईमानी फैल जाती है, जिससे भ्रष्टाचार होता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कड़ी मेहनत और धोखे रहित होना ही व्यक्तियों को उनके जीवन में आगे ले जाती है। उन्होंने कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सीसीएल अधिकारियों और वाणिज्य और प्रबंधन संकाय को बधाई देते हुए अपने संबोधन का समापन किया, जो आज की दुनिया में बहुत ही प्रासंगिक है।
इसके बाद विवि के कुलसचिव प्रो विजय कुमार सिंह का प्रेरक भाषण हुआ। उन्होंने ईमानदारी के स्तंभ पर बनी भारत की विरासत की समृद्धि और इसके खोए गौरव को बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस आयोजन और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता के लिए सीसीएल और पूरे वाणिज्य और प्रबंधन विभाग को बधाई दी। कार्यक्रम की शुरुआत कुछ छात्रों द्वारा किए गए स्वागत नृत्य के साथ हुई, जिसके बाद वाणिज्य और प्रबंधन संकाय के डीन और कार्यक्रम के संयोजक डॉ संदीप कुमार ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने देश में भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए छात्रों को प्रेरित करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता के बारे में बताया।
छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ अशोक कुमार अस्थाना ने सभागार में उपस्थित सभी लोगों को सत्यनिष्ठा की शपथ ग्रहण कराया। सुश्री आकांक्षा कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नीतू सिंघी ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। इस अवसर पर विजिलेंस के जनरल मैनेजर श्री सारंग गोपीनाथ चैधरी, विजिलेंस पदाधिकारी के टेक्निकल सेक्रेटरी श्री शशांक शरण, सीसीएल के पदाधिकारीगण एवं कर्मचारीवृंद सहित प्रो नीलिमा पाठक, प्रो एस बी दंडिन, श्री हरीबाबू शुक्ला, सभी एसोसिएट डीन, पदाधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
