मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची : केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा है कि झारखण्ड में शिक्षकों की अत्यधिक कमी है जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की राह में सबसे बड़ी बाधा है। झारखण्ड में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर करीब 90 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं और राज्य सरकार की इन रिक्तियों को भरने में कोई रुचि नहीं है। सस्ती लोकप्रियता और भावनायें भुनाने के लिए नीतियां ऐसी बनाई जा रही हैं जो संवैधानिक समीक्षा के दौरान या तो खारिज हो जा रही हैं या फिर इनकी वजह से बहालियां विवादित होकर लम्बे समय तक अटकी रह जाती हैं। अन्नपूर्णा देवी आज रांची के राजकीय अतिथिशाला में झारखण्ड सरकार के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, पीएम पोषण आदि विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा करने के बाद मीडिया से मुखातिब थीं।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पीएम श्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महात्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत देश भर के 14500 से ज्यादा विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करते हुए एक आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जाना है। झारखण्ड सरकार यदि पहल करती तो राज्य के प्रत्येक प्रखण्ड में ऐसे न्यूनतम दो – तीन विद्यालय विकसित हो जाते। लेकिन झारखण्ड देश के ऐसे इक्के – दुक्के राज्यों में शामिल है जिसने अबतक इसके लिए भारत सरकार के साथ एमओयू नहीं किया है। राज्य के बच्चों को बेहतर शिक्षा से वंचित कर आखिर राज्य सरकार अपने किस दंभ की पूर्ति कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की हालत यह है कि समग्र शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों के पैसे खर्च ही नहीं होते। योजनाएं तो आकर्षक हैं और अधिकारियों के पास दूरगामी परिणाम देने की इच्छाशक्ति भी दिखती है। लेकिन यदि राज्य में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे तो बेहतर शिक्षा व्यवस्था दिवा स्वप्न ही साबित होगा। इस मोर्चे पर सरकार चलानेवालों में इच्छाशक्ति की कमी साफ झलकती है।
केंद्रीय मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान राज्य के कस्तूरबा विद्यालयों की व्यवस्था पर असंतोष जताया और कहा कि इन विद्यालयों में शिक्षक और कर्मचारी सभी महिला ही हों, ये सुनिश्चित करें। उन्होंने पिछले दिनों राज्य के कुछ कस्तूरबा विद्यालयों में हुई अप्रिय घटनाओं का हवाला भी दिया। उन्होंने राज्य के अधिकांश विद्यालयों में चारदीवारी न होने पर चिंता जताई। उन्होंने माध्यमिक विद्यालयों में वोकेशनल शिक्षा का दायरा बढ़ाने का निर्देश भी दिया। स्कूलों के टॉयलेट्स केवल संख्या दिखाने के लिए नहीं हों वरन वे उपयोग के लायक भी हों, ये सुनिश्चित करने का निर्देश भी उन्होंने दिया।
