मुखर संवाद के लिये श्रवण यादव की रिपोर्टः-
हजारीबाग : ग्रेजुएट चायवाली से इंस्पायर होकर पेस्ट ग्रेजुएट वाली चाय के नाम से हजारीबाग में प्रसिद्ध हुई थी लेकिन उसकों भ्ज्ञी मनबचलों के अड्डाबाजी के कारण अपनी चाय की दुकान बंद करने को विवश होना पड़ा। पोस्टग्रेजुएट चाय वाली स्तूति टूडू ने युवकों की अड्डेबाजी से परेशान होकर अपनी टी स्टॉल को बंद कर दिया। पोस्टग्रेजुएट करने के बाद स्तुति ने कुछ जगहों पर काम किया लेकिन जब नौकरी नहीं जमी तो उसने खुद का व्यापार करने की ठानी।स्तुति ने अन्नदा चौक पर एक पोस्टग्रेजुएट चाय के नाम से एक टी स्टॉल खोल ली। शुरुआत में तो दुकान खूब चली और इस बीच वह काफी पापुलर भी हुई। पापुलारिटी का आलम यह था कि, उस समय सांसद और स्थानीय नेता भी उसकी दुकान पर चाय पीने आते थे। नेताओं ने स्तुति की टी स्टॉल पर चाय पीने के साथ ही नौकरी या बेहतर काम दिलाने का अश्वासन भी दिया। आज स्तुति को मनचलों से परेशान होकर अपनी दुकान बंद करनी पड़ी लेकिन नौकरी का वादा करने वाले नेता स्तुति की सुध लेना भी मुनासिब नहीं समझ रहे।
स्तुति बताती है कि, सांसद जयंत सिन्हा ने कहा था कि हम नौकरी दिलाने की कोशिश करेंगे। इस दौरान हमने एक आवेदन भी दिया लेकिन 5 माह होने के बाद भी कोई पहल नहीं हो सकी। अब मैं ठगा हुआ महसूस करने लगी हूं। लगता है कि नेता सिर्फ आश्वासन ही देते हैं। उनके द्वारा कही गई बातें धरातल पर नहीं उतरती। स्तुति टुडू एक गरीब आदिवासी युवती हैं। शादी के बाद बच्चे को जन्म देने के बाद उसने कई जगह पर काम भी किया लेकिन बेहद कम सैलरी होने के कारण वह कहीं स्थाई नहीं सकी। ऐसे में उसने खुद का टी स्टॉल खोलने का फैसला किया लेकिन मनचलों ने उसे भी बंद कर देने पर मजबूर कर दिया।
