मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: रांची के रामकृष्ण मिशन में ईसा मसीह की वैदिक रीति से आरती करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रांची के मोरहाबादी स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम में ईसा मसीह की वैदिक रीति से पूजा कर छप्पन भोग चढ़ाने का फोटो वायरल हो गया है। इसमें वहां के संन्यासी ईसा मसीह की आरती करते भी देखे जा सकते हैं। इस वीडियो के आने के बाद से हिंदू संगठनों में उबाल है। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री वीरेंद्र साहु ने कहा है कि रामकृष्ण मिशन के इस कारनामे से मतांतरण के कुकर्म को वैचारिक आधार मिलेगा। इस प्रकार का भ्रामक कार्यक्रम आयोजित कर समाज को गलत दिशा देने की कोशिश की विश्व हिंदू परिषद कड़ी निंदा करता है।
हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डा. सुमन कुमार ने कहा कि हमारी सीता माता, हनुमान आदि देवी देवताओं के बारे में ईसाई मिशन वाले क्या बोलते हैं, किसी से छिपा नहीं है। अपने संस्थापक स्वामी विवेकानंद के दर्शन के विरोधी ईसा मसीह को पूजने का काम रामकृष्ण मिशन वाले कर रहे हैं। उधर, कैथोलिक चर्च के सहायक बिशप थ्योडोर मास्करेन्हास ने कहा कि अगर कोई ईसा मसीह के रास्ते पर है तो इसमें गलत क्या है। प्रभु यीशु की पूजा जिसे जिस प्रकार से करनी हो करे। विवाद पर स्वामी भवेशानंद ने कहा कि क्रिसमस पूर्व संध्या पर ईसा मसीह की पूजा नई बात नहीं है। रामकृष्ण परमहंस का मानना था कि जितना मत, उतना पंथ। हमें अपना धर्म त्यागना नहीं है, बल्कि दूसरे धर्म में जो अच्छी बातें हैं, उसे ग्रहण करना चाहिए। धर्म जागरण मंच के सुबेदार सिंह का कहना है कि ईसा मसीह की पूजा से रामकृष्ण मिशन के सन्यासियों की असली आत्मा प्रकट हो गई है। वे लोग एनजीओ चलाने के लिए स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों को भी तिलांजलि दे रहे हैं। कुछ साल पहले भी गैर हिंदू अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग की थी।
