चमक धमक से बहुत दूर रहती थी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मांग हीरा बेन, सीएम और पीएम हाउस से दूर छोटे से घर में वर्षो रही

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मुखर संवाद के लिये श्रीधर प्रधान की रिपोर्टः-
गांधीनगर:- आज सुबह गांधी नगर के मुक्ति धाम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबेन का अंतिम संस्कार किया गया। अहमदाबाद के यू एन मेहता अस्पताल में आज तड़के उनका निधन हुआ। वह सौ वर्ष की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और परिवार के अन्य सदस्योंध ने सनातन हिन्दूा धर्म के अनुसार उनकी अंत्येष्टि की। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भावुक संदेश में कहा है कि एक शानदार शताब्दी अब भगवान की चरणों में लीन हो गयी है। उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि वे आज अपनी मां में एक साध्वीा, कर्मयोगी और नैतिकता को समर्पित व्योक्ति के रूप में देख रहे हैं। अंतिम संस्कानर में परिवार के सदस्य, राज्ये के मुख्यूमंत्री भूपेन्द्र पटेल और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। अपनी मां की सौंवीं वर्षगाठ के अवसर पर उनके साथ भेंट का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंरने उन्हें पूरी बुद्धिमत्ता के साथ कार्य करने और एक शुद्ध जीवन जीने की प्रेरणा दी थी। वर्ष 2015 में सान जोस के टाउन हॉल बैठक के दौरान फेसबुक के संस्थाापक मार्क जकरवर्ग के साथ बातचीत का उल्लेंख करते हुए उन्हेंस इस बात का ज्ञान हुआ कि उनकी मां को अपने बच्चों। की देख रेख में कितनी परेशानियों का सामना करना हुआ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन का जन्म 18 जून, 1923 में गुजरात के मेहसाणा ज़िले के विसनगर में हुआ था। यह गांव वडनगर के क़रीब है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहनगर है। उनके बारे में ज्यादा जानकारी लोगों को नहीं है।

नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री बने उसके बाद ही कुछ लोगों को उनके बारे में पता चला और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात के बाहर के लोगों को उनके बारे में कुछ-कुछ पता चला। उनके बारे में बहुत सारी जानकारी ख़ुद नरेंद्र मोदी के एक ब्लॉग से मिलती है। इसके अलावा नरेंद्र मोदी के बारे में लिखी गई कुछ एक किताबें हैं जिनसे उनकी मां हीराबेन के बारे में कुछ जानकारी मिलती है। नरेन्द्र मोदी ने जून, 2022 में उनके जन्मदिन के मौक़े पर एक ब्लॉग लिखा था। उस ब्लॉग में मोदी ने लिखा है कि उनकी मां ने स्कूल का दरवाज़ा नहीं देखा था, उन्होंने देखी थी तो सिर्फ़ ग़रीबी और घर में हर तरफ़ अभाव. हीराबेन जब बहुत छोटी थीं तभी उनकी मां का देहांत हो गया था, इसलिए उन्हें अपनी मां का प्यार नहीं मिल सका। उस ज़माने के हिसाब से बहुत ही कम उम्र में दामोदर दास मोदी से उनकी शादी हो गई। दामोदर दास क्या काम करते थे या उनकी रोज़ी-रोटी का क्या ज़रिया था इसके बारे में बहुत कम ही जानकारी है। बाद में नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे और ख़ुद मोदी भी बचपन में उनकी मदद करते थे। शादी के बाद नरेंद्र मोदी के माता-पिता वडनगर में बस गए। दामोदर दास और हीराबेन के कुल छह बच्चे हुए जिनमें पांच बेटे (सोमा मोदी, अमृत मोदी, नरेंद्र मोदी, प्रह्लाद मोदी, पंकज मोदी) और एक बेटी वासंती मोदी हैं. नरेंद्र मोदी तीसरे बेटे हैं। वडनगर का घर बहुत छोटा था और उसी घर में उन्हें अपने छह बच्चों को पालना था.अपनी मां के संघर्ष का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी लिखते हैं, घर चलाने के लिए दो चार पैसे ज्यादा मिल जाएं, इसके लिए मां दूसरों के घर के बर्तन भी मांजा करती थीं। समय निकालकर चरखा भी चलाया करती थीं क्योंकि उससे भी कुछ पैसे जुट जाते थे। कपास के छिलके से रूई निकालने का काम, रूई से धागे बनाने का काम, ये सब कुछ मां ख़ुद ही करती थीं. उन्हें डर रहता था कि कपास के छिलकों के कांटें हमें चुभ ना जाएं।

मोदी ने अपनी मां के रहन-सहन का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि उनकी मां शुरू से ही साफ़-सफ़ाई को तवज्जो देने वाली रही हैं। घर साफ़ रहे इसलिए घर को ख़ुद ही लेपती थीं, घर की दीवारों पर कांच के टुकड़े चिपकाकर आकृतियां बनाती थीं। मोदी उसी ब्लॉग में लिखते हैं, ष्हर काम में परफ़ेक्शन का उनका भाव इस उम्र में भी वैसा का वैसा ही है और गांधीनगर में अब तो भैया का परिवार है, मेरे भतीजों का परिवार है, वो कोशिश करती हैं कि आज भी अपना सारा काम ख़ुद ही करें। 1989 में नरेंद्र मोदी के पिता का देहांत हो गया। तब हीराबेन वडनगर का घर छोड़कर अपने सबसे छोटे बेटे पंकज मोदी के साथ गांधीनगर के बाहरी इलाक़े रायसन गांव में रहने लगीं. पंकज मोदी गुजरात सरकार के सूचना विभाग में काम करते थे और उन्हें सरकारी घर मिला हुआ था
पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा है, आपने भी देखा होगा, मेरी मां कभी किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में मेरे साथ नहीं जाती हैं. अब तक दो बार ही ऐसा हुआ है जब वो किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मेरे साथ आई हैं.। साल 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और दिल्ली रहने लगे। वो पिछले आठ सालों से भारत के प्रधानमंत्री हैं और अब तक केवल एक बार सार्वजनिक तौर पर ऐसा देखा गया है कि उनकी मां दिल्ली में उनसे मिलने प्रधानमंत्री आवास आई थीं। मोदी ने ख़ुद अपने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की थीं। विपक्षी पार्टी समेत बहुत सारे लोग यह सवाल पूछते हैं कि आख़िर नरेंद्र मोदी अपनी मां को अपने साथ क्यों नहीं रखते। जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब भी उनकी मां मुख्यमंत्री आवास से सिर्फ़ तीन-चार किलोमीटर दूर स्थित अपने छोटे बेटे पंकज मोदी के साथ रहती थीं। मोदी जब प्रधानमंत्री बने तब भी वो अपने छोटे बेटे के ही साथ रहती थीं। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल इसको लेकर नरेंद्र मोदी पर निशाना साध चुके हैं।
बात जनवरी, 2017 की है. मोदी अपनी मां से मिलने गांधीनगर गए थे। मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि योग छोड़कर वो मां से मिलने गए थे. उनके साथ नाश्ता किया था। इस पर केजरवील ने मोदी पर हमला करते हुए ट्वीट किया था, मैं अपनी मां के साथ रहता हूं। रोज़ उनका आशीर्वाद लेता हूं, लेकिन ढिंढोरा नहीं पीटता। मैं मां को राजनीति के लिए बैंक की लाइन में भी नहीं लगाता। मोदी की मां ने शायद कभी सार्वजनिक तौर पर नहीं कहा कि वो अपने तीसरे बेटे के साथ क्यों नहीं रहती हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी ने एक बार ख़ुद इसका जवाब दिया था।

साल 2019 में फ़िल्मस्टार अक्षय कुमार के साथ एक बातचीत में मोदी ने इस बारे में ज़िक्र किया था। वो बातचीत पूरी तरह ग़ैर-राजनीतिक थी और इस दौरान अक्षय कुमार ने उनसे उनकी ज़िंदगी के बारे में कई सवाल किए थे। उनमें एक सवाल यह भी था कि वो अपनी मां या परिवार के दूसरे लोगों को साथ क्यों नहीं रखते। इस सवाल के जवाब में मोदी ने कहा था कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र में घर छोड़ दिया था क्योंकि वो ज़िंदगी बहुत अलग थी। बातचीत में मोदी ने कहा था, अगर मैं प्रधानमंत्री बनकर घर से निकला होता, तो मेरा मन रहता कि सब वहीं रहें। लेकिन मैंने बहुत छोटी उम्र में घर छोड़ दिया था और इसलिए लगाव, मोह माया यह सब मेरी ट्रेनिंग के कारण छूट गया। मेरी मां कहती हैं कि मैं तुम्हारे घर पर रहकर क्या करूंगी. मैं तुमसे क्या बात करूंगी।

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