विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और क्रियान्वयन विषय पर आयोजित बैठक, सभी सरकारी निजी विश्वविद्यालयों सहित सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए विचार विमर्श

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची : विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और क्रियान्वयन विषय पर आयोजित बैठक, आदित्य प्रकाश जलान टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, कृष्ण चंद्र गांधी शैक्षिक नगर, कुदलुम रांची के सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। बैठक में राज्य के सभी सरकारीनिजी विश्वविद्यालयों सहित सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए विचार विमर्श किए गए।

सह सरकारवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने राज्य के सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समाज कर्तव्य केंद्रित न होकर अधिकार केंद्रित हो गया है। हमें बेहतर समाज निर्माण के लिए अपने कर्तव्यों का बखूबी पालन करना होगा। कर्तव्यों के बखूबी पालन से ही अधिकारों की प्राप्ति संभव हो सकती है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ भारतीय जीवन मूल्यों को अपनाते हुए राष्ट्र के लिए उपयोगी कर्तव्यनिष्ठ नागरिक निर्माण करना है। भारतीय शिक्षा दर्शन आध्यात्म आधारित एवं ऋषि आधारित है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ज्ञान, शील, प्रेमभाव से युक्त व्यक्ति के व्यक्तित्व व चरित्र का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के विविध क्षेत्रों में भारतीय ज्ञान की अपनी विशेष विशेषता रही है जिससे हमारे शिक्षकों और छात्रों को अभी तक अनभिज्ञ रखा गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी शैक्षिक संस्थानों की आपसी समूचित सहभागिता आवश्यक है।

बैठक में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर क्षिति भूषण दास ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के संदर्भ में अपनी राय रखते हुए कहा कि इंडिया सेंट्रिक एजुकेशन के लिए अंडरस्टैंडिंग इंडिया यानी “भारत को जाने“ विषय को सभी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में आवश्यक रूप से शामिल करते हुए लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की विशेषताओं की चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षकों को प्रेम, लगाव,आत्मीयता के भाव के साथ अपने छात्रों के समक्ष ज्ञान का प्रस्तुतीकरण करना चाहिए। सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक ने अपने विश्वविद्यालय में एनईपी के क्रियान्वयन से संबंधित कार्यों की जानकारी देते हुए अकादमिक क्रेडिट ट्रांसफर के बारे में अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। शिक्षकों और छात्रों के बीच बढ़ती दूरी को चिंताजनक बताते हुए उन्होंने छात्रों में ज्ञानार्जन के लिए शत प्रतिशत कक्षाएं संचालित किए जाने की बात कही। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची के कुलपति प्रोफेसर तपन कुमार शांडिल्य ने भारतीय अर्थशास्त्र की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय अर्थशास्त्र “खूब कमाओ, कम से कम खर्च करो“ के सिद्धांत को अपनाते हुए मितव्ययी होने की प्रेरणा देती है, जबकि पाश्चात अर्थशास्त्र ऋणम् कृत्वा घृतम् पिवेत के सिद्धांत को अपनाने की पक्षधर है। बैठक में सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक, झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विजय कुमार पाण्डेय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तपन कुमार शांडिल्य, सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो विजय कुमार सिंह, जेयूटी के कुलसचिव डॉ अमर कुमार चौधरी, पूर्व कुलपति प्रो अंजनी श्रीवास्तव, विद्या भारती के संगठन मंत्री श्री ख्यालीराम जी, आदित्य प्रकाश जालान बीएड कॉलेज के अध्यक्ष श्री रामअवतार नरसरिया, आदित्य प्रकाश जालान बीएड कॉलेज के सचिव श्री भानु प्रकाश जालान, उषा मार्टिन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अनिल कुमार मिश्रा, आदित्य प्रकाश जालान टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ रामकेश पांडेय, सरला बिरला विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ भारद्वाज शुक्ल आदि उपस्थित थे।

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