नगर विकास मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू का बड़बोलापन पड़ा झामुमो को महंगा, बिहार चुनाव में झामुमो नहीं उतार पाया प्रत्याशी

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मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
गिरिडीह: हेमंत सरकार के नगर विकास मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू का बड़बोलापन ही झामुमो के लिये काल बन गया। झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान में तेजस्वी यादव के साथ बदतमीजी और तेजस्वी यादव के साथ बदतमीजी का खामियाजा झारखंड मुक्ति मोर्चा को महंगा पड़ा। सुदीव्य कुमार सेानू ने झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव को राजद का झारखंड में जनाधार नहीं होने की बात कही थी। इसी का खामियाजा झामुमो को महागठबंधन में बिहार में उठाना पड़ा। बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो को कोई खास तवज्जों कांग्रेस और राजद ने नहीं दी। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच महागठबंधन और झामुमो के बीच दरार पड़ गई है। इसी के साथ झामुमो बिहार विस चुनाव में पत्याशी नहीं उतार सका। झामुमो ने इसके लिए राजद और कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह में नया परिसदन में प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि बिहार विस चुनाव में झामुमो के साथ राजनीतिक चालबाजी की गई है। चुनाव में झामुमो की भागीदारी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि बिहार विस चुनाव के दूसरे चरण के मतदान को लेकर नामांकन की तिथि आज समाप्त हो गई। इस चुनाव से झामुमो ने खुद अलख कर लिया है। इसमें झामुमो की कोई भागीदारी नहीं होगी। इसके लिए राजद पूरा जिम्मेवार है,जबकि गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने के लिए कांग्रेस भी जिम्मेवार है। झामुमो महागठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था। झामुमो ने 2015 के चुनाव में राजद को मदद की थी। राजद ने 2020 के चुनाव में झामुमो को तीन सीटें देने का वादा किया था, लेकिन नहीं दिया। 2024 के झारखंड विस चुनाव में झामुमो ने राजद, कांग्रेस और वाम दलों को शामिल कर गठबंधन धर्म का पालन किया। बिहार चुनाव में झामुमो के साथ धोखा किया गया। झामुमो इससे आहत है।

मंत्री ने कहा कि पार्टी संगठन की तरफ से मुख्यमंत्री के निर्देश पर वे गत सात अक्टूबर को पटना गए थे। वहां राजद के शीर्ष नेतृत्व से वार्ता हुई थी। वार्ता में झामुमो को पांच सीटें देने पर सहमति बनी थी, लेकिन झामुमो के साथ राजनीतिक धूर्तता करते हुए इसे महागठबंधन में नहीं रखा गया, इससे झामुमो काफी आहत है..उन्होंने कहा कि इस तरह के बर्ताव का खामियाजा उन ताकतों को भी भुगतना पड़ेगा, जिन्होंने झामुमो को आहत किया है। इसमें जितना दोषी राजद है उतना ही जिम्मेवार कांग्रेस भी है, क्योंकि इस पूरे मामले में कांग्रेस चुप रही। बिहार विधानसभा चुनाव से झामुमो को अलग करने का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यहां कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। मंत्री सोनू ने ऐसा संकेत भी दिया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संगठन महागठबंधन के क्रियाकलापों की समीक्षा कर झामुमो और झारखंड के हितों के अनुरूप निर्णय लेगा। लेकिन इन तमाम आरोपों के वावजूद झामुमो के इस स्थिति का असली कारण मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ही है। सुदीव्य कुमार सोनू से राजद के प्रत्याशी शक्ति यादव ने कुछ ऐसे तंज कसें जो तेजस्वी के अपमान का प्रतिकार था। अब झामुमो अकेले अपने प्रत्याशी भी नहीं उतार सका क्योंकि उसका जनाधार बिहार में नहीं दिखा। झामुमों ने अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा से वापस आकर अपनी प्रतिष्ठा बरकार रखने में ही अपनी भलाई समझी है।

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