आर्ट एंड साइंस ऑफ सिम्युलेटिंग कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स: चौलेंजेस एंड ऑपर्च्युनिटीज विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रो जगनाथन ने बीआईटी में वनस्पति प्रवर्धन पर दिया व्याख्यान

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: बीआईटी मेसरा में आर्ट एंड साइंस ऑफ सिम्युलेटिंग कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स: चौलेंजेस एंड ऑपर्च्युनिटीज विषय पर चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सी जगनाथन ने मानव जीवन और पृथ्वी में मौजूद वानस्पतिक संबंधों पर प्रकाश डाला। धरती में मौजूद एक तिहाई वनों की मौजूदगी और इससे जलवायु परिवर्तनों और वर्तमान समय में वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से देश में इसके मापन और इस संदर्भ में चल रहे शोध पर भी उन्होंने उपस्थित श्रोताओं के समक्ष अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।

गौरतलब है कि प्रो जगनाथन भारत के ऐसे पहले वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर मानव जीवन पर वानस्पतिक प्रभावों का परिमापन किया है। इसके लिए उन्होंने भारत के विभिन्न इलाकों में आधुनिकतम वैज्ञानिक यंत्रों का इस्तेमाल कर पारिस्थितिकी तंत्र की मॉनिटरिंग भी की। इस विषय पर उनके रिसर्च पेपर विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए हैं। विश्वविख्यात दलमा अभयारण्य में जलवायु परिवर्तन पर उनके द्वारा किए गए कार्य चर्चा का विषय रहे हैं। सम्मेलन के अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जियोमैग्नेटिज्म के निदेशक प्रो. ए. पी. डिमरी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार माल एवं प्रो. राजीव बाटला, बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना, डॉ. आर. के. सिन्हा, डॉ. निधि श्रीवास्तव, डॉ. मधु प्रिया समेत अन्यान्य उपस्थित रहे।

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