
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीः पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में सरकारी स्तर पर धान खरीदी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हेमंत सोरेन सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित है, जिसका सीधा नुकसान राज्य के किसानों को हो रहा है और बिचौलियों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज राज्य में सरकारी स्तर पर धान खरीदी में हो रहे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देश विदेश का दौरा करते हैं और बोलते हैं कि उनकी सरकार गांव से चलती है। लेकिन सच्चाई क्या है, राज्य के लाखों किसानों से पूछा जा सकता है। गांव के रीढ़ कहे जानेवाले किसान लाचार और परेशान हैं। हेमंत सरकार ने विधानसभा चुनाव में 3200 रूपये एमएसपी पर धान खरीद का वादा किया। लेकिन बाद में 2400 रुपए की घोषणा कर दी जिसमें 2300 रुपया तो केंद्र सरकार से ही अनुदान मिलता है। राज्य सरकार की भागीदारी केवल 100 रुपए है। इसके बाद भी किसानों से धान क्रय में बिचौलिए और दलाल हावी हैं। इस वर्ष 60लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन दो महीना से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अब तक 19 लाख 80 हजार 216 क्विंटल धान ही किसानों से खरीदे गए है। राज्य में 2 लाख 79 हजार किसान पंजीकृत हैं लेकिन मात्र 35547 किसानों से ही धान खरीदे गए हैं।बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार बिचौलियों और दलालों को धान बेचने के लिए किसानों को मजबूर कर रही है। किसान 1500 रूपये क्विंटल धान बेचेंगे और सरकार बिचौलियों से धान खरीद कर लक्ष्य पूरा करने का दिखावा करेगी। इसके कारण निर्धारित दर का लाभ बिचौलियों के खाते में जाएगा जिससे सरकार में बैठे लोगों की भी तिजोरी भरी जाएगी। उन्होंने कहा कि गुमला जिला में इस तरह के मामले से उन्होंने मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया। सदन में भी मामला उठाया। बताया कि कैसे फर्जी किसान बनाए जा रहे हैं।
मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद सिर्फ कागजों तक सीमित है। जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीद केंद्रों तक पहुँच ही नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लाखों किसान पंजीकृत होने के बावजूद बहुत कम किसानों से ही धान की वास्तविक खरीद हो रही है, जिससे खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, कई जिलों में खरीद केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं, सर्वर डाउन, नमी और गुणवत्ता के नाम पर किसानों को वापस लौटाया जा रहा है। इससे मजबूर होकर किसान बिचौलियों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने को विवश हैं। मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि धान खरीदी के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी की गई राशि का लाभ वास्तविक किसानों तक नहीं पहुँच रहा है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा बिचौलियों और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों और दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों को निराधार बताया गया है। सरकार का कहना है कि धान खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसानों को समय पर भुगतान उनके बैंक खातों में किया जा रहा है। हालांकि विपक्ष का दावा है कि सरकार के दावों और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर है। धान खरीदी को लेकर उठे इस विवाद से राज्य की राजनीति गरमा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर किसानों की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
