
रांची: राजधानी रांची में मेयर पद का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। निर्दलीय प्रत्याशी सुजाता कच्छप को राजद द्वारा समर्थन दिए जाने के बाद मुकाबला अब और भी रोमांचक हो गया है। पहले से ही मैदान में उतरे भाजपा,कांग्रेस और झामुमो के प्रत्याशियों के बीच अब सीधी और बहुकोणीय टक्कर देखने को मिल रही है। नगर निगम चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर हो रहा हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने खुलकर अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार अभियान तेज कर दिया है। राजद के समर्थन से सुजाता कच्छप की दावेदारी को नई मजबूती मिली है और उनके चुनाव अभियान में कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ गई है।
रांची मेयर पद की दौड़ में इस समय चार प्रमुख राजनीतिक धाराएं स्पष्ट दिख रही हैं। भाजपा अपने समर्थित उम्मीदवार के साथ शहर में विकास और सुशासन को मुद्दा बना रही है। कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी के पक्ष में व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। झामुमो, जो राज्य की सत्ताधारी पार्टी है, संगठनात्मक ताकत के दम पर मैदान में है। वहीं राजद द्वारा सुजाता कच्छप को समर्थन देने से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजद का समर्थन विशेषकर कुछ वार्डों में निर्णायक साबित हो सकता है, जहां पार्टी का परंपरागत वोट बैंक प्रभावी है।
सभी प्रत्याशी शहर की बुनियादी समस्याओंकृसड़क, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता और यातायात व्यवस्थाकृको मुख्य चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। जनसभाओं और नुक्कड़ बैठकों का दौर तेज हो गया है। सोशल मीडिया के जरिए भी मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिशें जारी हैं। दिलचस्प बात यह है कि राज्य स्तर पर सहयोगी रहे दल नगर निकाय चुनाव में अलग-अलग रणनीति अपनाए हुए हैं। इससे यह चुनाव केवल स्थानीय निकाय तक सीमित न रहकर राजनीतिक ताकत की परीक्षा भी बन गया है।
आगामी मतदान तिथि को देखते हुए सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रांची की जनता किसे मेयर की जिम्मेदारी सौंपती है। कुल मिलाकर, राजद के समर्थन के बाद रांची मेयर चुनाव ने नया राजनीतिक रंग ले लिया है और मुकाबला भाजपा, कांग्रेस, झामुमो और राजद समर्थित उम्मीदवारों के बीच बेहद रोचक हो गया है।
