19 मार्च को रांची में डिप्टी मेयर का होगा चुनाव, डिप्टी मेयर के लिये रांची में कांग्रेस करेगी कोशिश

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: झारखंड के नगर निकाय चुनाव में मेयर और पार्षद पद के चुनाव संपन्न होने के बाद अब डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी की नजर अप्रत्यक्ष रूप से होने वाले इन पदों के चुनाव पर टिकी हुई है, जिसको लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज है। नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि कई दल पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए पर्दे के पीछे सक्रिय हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रक्रिया में अक्सर जनादेश की भावना कमजोर पड़ जाती है और सत्ता संतुलन के लिए जोड़दृतोड़ की राजनीति हावी होने लगती है। इस पर विपक्षी दलों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी नगर निकायों में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पार्षदों का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का पद केवल औपचारिक नहीं होता, बल्कि नगर प्रशासन की दिशा तय करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इन पदों के चुनाव को लेकर राजनीतिक सक्रियता और आरोपदृप्रत्यारोप की स्थिति बनना स्वाभाविक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकायों में इन दोनों पदों का चुनाव आगे की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक संतुलन के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। यही वजह है कि मेयर और पार्षद चुनाव के बाद अब सभी दलों की निगाहें डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव पर टिक गई हैं।

राज्य के 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 10 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए तिथिवार कार्यक्रम तय कर दिया है। आयोग का लक्ष्य है कि 10 दिनों के भीतर सभी निकायों में शपथ ग्रहण और डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष का चुनाव संपन्न करा लिया जाए, ताकि नई नगर सरकारें पूरी तरह कार्य करना शुरू कर सकें। नगर निगम क्षेत्रों में डिप्टी मेयर का चुनाव होगा, जबकि नगर परिषद और नगर पंचायतों में उपाध्यक्ष चुने जाएंगे। प्रमुख नगर निगमों की बात करें तो रांची नगर निगम में 19 मार्च, धनबाद नगर निगम में 18 मार्च, मानगो नगर निगम में 17 मार्च और मेदिनीनगर नगर निगम में 14 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। अन्य निकायों में भी 10 से 20 मार्च के बीच कार्यक्रम निर्धारित है।
यह चुनाव परोक्ष (अप्रत्यक्ष) प्रणाली से होगा। यानी आम मतदाता इसमें भाग नहीं लेंगे, बल्कि केवल निर्वाचित वार्ड सदस्य ही मतदान करेंगे। मेयर और अध्यक्ष इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। निर्वाचित वार्ड पार्षदों में से कोई भी डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बन सकता है। इस पद के लिए किसी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले सभी वार्ड सदस्यों का शपथ ग्रहण होगा। नगर निगमों में मेयर को प्रमंडलीय उपायुक्त शपथ दिलाएंगे, जबकि नगर परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों को जिला प्रशासन शपथ दिलाएगा। इसके बाद डिप्टी मेयर/उपाध्यक्ष के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी।नगर निगमों में अब डिप्टी मेयर पद के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा, झामुमो और कांग्रेस के बीच एक बार फिर सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। मेयर चुनाव के नतीजों ने जहां दलों की ताकत का संकेत दे दिया है, वहीं डिप्टी मेयर का चुनाव नए समीकरण भी गढ़ सकता है।

इस बार नौ नगर निगमों में से तीन पर भाजपा समर्थित, एक पर कांग्रेस समर्थित और दो पर झामुमो समर्थित उम्मीदवारों ने मेयर पद पर जीत दर्ज की है। वहीं तीन नगर निगमों में निर्दलीय मेयर चुने गए हैं। ऐसे में डिप्टी मेयर के चुनाव में राजनीतिक दलों की नजर खासकर निर्दलीय मेयर और पार्षदों पर रहेगी। डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का चुनाव नगर निगम के निर्वाचित वार्ड पार्षद करेंगे। इसलिए इस चुनाव में किस दल के पास कितने पार्षद हैं और कौन किसके साथ जाता है, इसी पर परिणाम निर्भर करेगा। राज्य के नगर निगमों में वार्डों की संख्या भी समीकरण तय करेगी। आदित्यपुर में 35, देवघर में 36, मेदिनीनगर में 35, हजारीबाग में 36, गिरिडीह में 36, धनबाद में 55, चास में 35, रांची में 53 और मानगो नगर निगम में 36 वार्ड हैं। बड़े नगर निगमों, जैसे धनबाद और रांची, में डिप्टी मेयर की लड़ाई रोचक हो सकती है। मार्च के पहले सप्ताह में सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने समर्थक वार्ड पार्षदों के साथ बैठक करेंगे। इसमें उम्मीदवारों के नाम तय करने और समर्थन सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा होगी। जिन नगर निगमों में मेयर निर्दलीय हैं, वहां डिप्टी मेयर का चुनाव और भी दिलचस्प हो सकता है।

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