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मुखर संवाद के लिये प्रमिला यादव की रिपोर्टः-
नयी दिल्लीः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ममता बनर्जी सरकार को सीधे निशाने पर लिया है । उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “यह शर्मनाक और पहले कभी नहीं हुआ. हर कोई जो डेमोक्रेसी और आदिवासी समुदायों के एम्पावरमेंट में विश्वास करता है, निराश है। राष्ट्रपति जी, जो खुद एक आदिवासी समुदाय से हैं, ने जो दर्द और पीड़ा ज़ाहिर की है, उससे भारत के लोगों के मन में बहुत दुख है.”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं. राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका एडमिनिस्ट्रेशन ज़िम्मेदार है. यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल कल्चर जैसे ज़रूरी विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से पेश आती है। राष्ट्रपति का ऑफिस पॉलिटिक्स से ऊपर है और इस ऑफिस की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए. उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार में समझदारी आएगी.”
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इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी को अपनी ‘छोटी बहन’ बताया और हैरानी जताई कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री किसी बात को लेकर ‘नाराज’ हैं क्योंकि उत्तर बंगाल दौरे के दौरान उनका स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री आईं और न ही कोई अन्य मंत्री मौजूद था ? द्रौपदी मुर्मू ने सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आदिवासियों की एक सभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। राष्ट्रपति दिन में बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर में एक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं।
उन्होंने कहा, “वहां पर्याप्त जगह है और कई लोग शामिल हो सकते थे, लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी. आज का कार्यक्रम ऐसी जगह पर हो रहा है, जहां लोगों का आना मुश्किल है।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहती और इसलिए उन्हें यहां आने से रोका गया।”
