
मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
रांची: रांची नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर के साथ ही बीजेपी का पार्षदों पर अपना प्रभाव होकर एकतरह से रांची नगर निगम के भगवामय होने के संकेत मिले हैं। रांची नगर निगम के डिप्टी मेयर पद पर नीरज कुमार की जीत के बाद सियासी विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवार नीरज कुमार की सफलता पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “हॉर्स ट्रेडिंग का नतीजा” बताया है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव से पहले पार्षदों की खरीद-फरोख्त की गई। उन्होंने दावा किया कि एक-एक पार्षद को करीब 10 लाख रुपये तक का ऑफर देकर अपने पक्ष में मतदान कराने की कोशिश की गई। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ हैं और इससे स्थानीय निकाय चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नीरज कुमार की जीत पार्षदों के विश्वास और समर्थन का परिणाम है, न कि किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त का। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी हार से बौखलाकर इस तरह के आरोप लगा रही है। केन्द्रीय रक्षाराज्य मंत्री संजय सेठ ने कांग्रेस पर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत चरितार्थ होने का दावा किया है। संजय सेठ ने कहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कां्रगेस लागातार हार रही है और वह इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रही हैै।
इस बीच, डिप्टी मेयर चुनाव को लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है। आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या नहीं। फिलहाल, आरोप-प्रत्यारोप के बीच नीरज कुमार की जीत ने रांची की सियासत को एक नया मोड़ दे दिया है। नीरज कुमार की एकतरफा जीत से यह लगने लगा है कि नगर निकायों के चुनाव में धनबाद,गिरिडीह, देवघर और चास में मिली हार से सबक लेते हुए रांची नगर निगम में मेयर के बाद अब डिप्टी मेयर के चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। यह हॉर्स ट्रडिंग का नतीजा है या रणनीति का यह सवाल सभी को चौंका रहा है ।
