
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
गिरिडीह: झारखंड की राजनीतिक धड़कनों के बीच गिरिडीह में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का 53वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह, ऊर्जा और भावनात्मक माहौल के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राज्य भर से पार्टी के दिग्गज नेता, पदाधिकारी और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता जुटे। कार्यक्रम ने एक ओर जहां संगठन की ताकत का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान को याद करते हुए वातावरण भावुक हो उठा। समारोह की शुरुआत पारंपरिक तरीके से शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। मंच पर उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘गुरुजी’ के संघर्षमय जीवन को नमन करते हुए उनके द्वारा झारखंड आंदोलन को दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। कई वक्ताओं की आंखें नम हो गईं जब उन्होंने उन दिनों को याद किया, जब अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर लंबा संघर्ष चला था। नेताओं ने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक जननायक थे, जिन्होंने आदिवासी, मूलवासी और वंचित समाज के हक और अधिकारों के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में चला आंदोलन ही आगे चलकर झारखंड राज्य के गठन का आधार बना। वक्ताओं ने कहा कि आज जो झारखंड हमें मिला है, वह उनके त्याग, संघर्ष और दूरदर्शिता का परिणाम है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर पार्टी की प्रमुख नेता कल्पना सोरेन ने अपने संबोधन से कार्यक्रम को नई दिशा दी। उन्होंने अपने भावुक लेकिन दृढ़ भाषण में कहा, “झामुमो कोई पार्टी नहीं, एक विचार है। यह एक ऐसा आंदोलन है, जो गरीबों, आदिवासियों, दलितों और शोषितों के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा हुआ और आज भी उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।” उनके इस बयान ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया।
कल्पना सोरेन ने कहा कि झामुमो की असली ताकत उसके कार्यकर्ता हैं, जो गांव-गांव तक संगठन को मजबूत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की जड़ें समाज के सबसे निचले तबके तक फैली हुई हैं और यही कारण है कि झामुमो हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ा रहता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पार्टी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
उन्होंने यह भी कहा कि झामुमो ने हमेशा सामाजिक न्याय, समानता और विकास को प्राथमिकता दी है। राज्य में चल रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के विश्वास पर खरी उतरने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आने वाले समय में संगठन को और सशक्त बनाने तथा युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी संगठन की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि झामुमो ने हमेशा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी है और आगे भी यही नीति जारी रहेगी। नेताओं ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और युवाओं को नेतृत्व में आगे लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से कलाकारों ने झारखंडी अस्मिता और गौरव को प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इससे कार्यक्रम का माहौल और भी जीवंत हो गया।
गिरिडीह में आयोजित इस स्थापना दिवस समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि झामुमो आज भी अपने मूल विचारों और सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन है, जो समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहा है और आगे भी लड़ता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिबू सोरेन के दिखाए रास्ते पर चलने और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। इस अवसर ने न केवल अतीत के संघर्षों को याद करने का मौका दिया, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। गिरिडीह का यह आयोजन झामुमो की एकजुटता, संगठनात्मक शक्ति और राजनीतिक प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश देने में सफल रहा।
