
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: आज के दौर में केवल पढ़ाई ही सफलता का एकमात्र माध्यम नहीं रह गया है। बच्चों की जिस क्षेत्र में रुचि हो, उन्हें उसी दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले डॉक्टर और इंजीनियर बनना ही प्रमुख लक्ष्य माना जाता था, लेकिन आज संगीत, नृत्य, पेंटिंग, खेल और तीरंदाजी जैसे क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं हैं, जहां बच्चे अपनी प्रतिभा के दम पर नाम, शोहरत और आर्थिक सफलता हासिल कर सकते हैं। ये बातें पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने डोरंडा स्थित छप्पन सेट परिसर में रागाश्री एकेडमी डांस एंड म्यूजिक (आरएडीएम) के वार्षिकोत्सव के अवसर पर कही । आलोक दूबे ने दो दिवसीय संगीत एवं नृत्य प्रतियोगिता का उद्धघाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में बच्चों, अभिभावकों और कला प्रेमियों की उपस्थिति रही। संगीत की गुरु मां श्रीमती रीता बंदोपाध्याय,विकास चन्द्र, डायरेक्टर जितेन्द्र कुमार शंभू,पूजा कुमारी, चन्द्रमोहन मुख्य रुप से उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। आयोजकों ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को मंच देना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
इस दौरान उन्होंने राजधानी में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर हाल की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। रांची में हुई तीन घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये घटनाएं बेहद गंभीर, चिंताजनक और भयावह हैं और इसकी जितनी भी निन्दा की जाए वह कम होगी।हर घर और परिवार इसको लेकर चिंतित है, इसलिए समाज को मिलकर इसका समाधान निकालना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी सराहनीय है, लेकिन यह घटनाएं समाज में पनप रही घृणित मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि समाज में एक सख्त संदेश जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। साथ ही उन्होंने सभी निजी विद्यालयों से अपील करते हुए कहा है कि ड्राइवर,खलासी,चपरासी,शिक्षक सहित सभी कर्मचारी की नियुक्ति से पहले समुचित काउंसलिंग और सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
आलोक दूबे ने कहा महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध केवल किसी एक राज्य या सरकार की समस्या नहीं, बल्कि यह एक देशव्यापी सामाजिक चुनौती बन चुकी है। इसका स्थायी समाधान तभी संभव है जब समाज, सरकार, प्रशासन और सभी राजनीतिक दल मिलकर ठोस पहल करें।
उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही घटनाएं समाज के लिए बेहद चिंताजनक हैं और यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक सोच और मानसिकता से जुड़ा हुआ मुद्दा है। श्री दूबे ने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानूनों के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि दोषियों में भय का माहौल बने और पीड़ितों को न्याय मिल सके।
