पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 की बढ़ोतरी, आम लोगों पर बढ़ा महंगाई का बोझ, ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
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Mukhar samvad के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट
रांची : देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है। ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम बाजार में कीमतों का बढ़ना लगातार जारी है l काफी लंबे अरसे से इसकी संभावना बनी हुई थी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए l नई दरें लागू होने के बाद वाहन चालकों से लेकर परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों तक पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता और बढ़ा दी है।
नई कीमतों के अनुसार राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹3 बढ़कर नए स्तर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल के दाम में भी समान बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी प्रकार मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, रांची और अन्य शहरों में भी तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण यह फैसला लिया गया है। ईंधन की कीमत बढ़ने का सबसे अधिक असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। ट्रक, बस, टैक्सी और ऑटो चालकों का कहना है कि डीजल महंगा होने से परिचालन लागत बढ़ जाएगी, जिसका असर किराए और माल ढुलाई शुल्क पर पड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में फल, सब्जी, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आम लोगों ने भी सरकार और तेल कंपनियों के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। वाहन चालकों का कहना है कि पहले से ही घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव है, ऐसे में ईंधन की कीमत बढ़ने से खर्च और बढ़ जाएगा। नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार ने पहले से बढ़ोतरी करने का फैसला किया था लेकिन पांच राज्यों के चुनाव के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका था l विपक्ष का कहना है कि सरकार को जनता को राहत देने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले टैक्स में कमी करनी चाहिए। कई राजनीतिक दलों ने बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने की मांग की है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक बाजार के दबाव के कारण कीमतों में बदलाव करना आवश्यक हो गया था।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। हालांकि यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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