
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: युवा राष्ट्रीय जनता दल की ओर से 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर पतरातू में आयोजित होने जा रहे श्युवा संवाद चौपाल यात्राश् के समापन समारोह को संगठन झारखंड में अपने युवा जनाधार को मजबूत करने और राजनीतिक संदेश देने के बड़े मंच के रूप में देख रहा है। कार्यक्रम में युवा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय कुशवाहा, झारखंड युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार सहित राजद के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रहेगी। इस आयोजन के माध्यम से पार्टी युवाओं को सामाजिक न्याय, अधिकार और संघर्ष के मुद्दों पर एकजुट करने का प्रयास करेगी।
30 जून का दिन झारखंड के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह दिन 1855 के संथाल हूल की याद दिलाता है, जब आदिवासी समाज ने अन्याय और शोषण के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह किया था। युवा राजद इसी ऐतिहासिक विरासत को वर्तमान समय के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जोड़ते हुए युवाओं के बीच नया संदेश देने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि जिस प्रकार हूल आंदोलन ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष की चेतना जगाई थी, उसी तरह आज के युवाओं को भी अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए।
समापन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार युवाओं को संबोधित करते हुए श्हूलश् का आह्वान करेंगे। उनका संदेश केवल ऐतिहासिक विद्रोह की स्मृति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे वर्तमान दौर में युवाओं की भागीदारी, लोकतांत्रिक संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन से जोड़ने की कोशिश होगी। पार्टी का कहना है कि राज्य के युवाओं के सामने बेरोजगारी, पलायन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार जैसी कई चुनौतियां हैं, जिनके समाधान के लिए संगठित जनभागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में युवा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय कुशवाहा की उपस्थिति आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का महत्व प्रदान करेगी। माना जा रहा है कि वे संगठन विस्तार, युवा नेतृत्व को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। उनके संबोधन में सामाजिक न्याय, संविधान की मूल भावना और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों के प्रमुखता से उठने की संभावना है। राज्यभर में आयोजित की गई श्युवा संवाद चौपाल यात्राश् का उद्देश्य गांव-गांव और शहर-शहर जाकर युवाओं से संवाद स्थापित करना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें संगठन से जोड़ना रहा है। इस यात्रा के दौरान रोजगार, शिक्षा, सामाजिक समानता, किसानों और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। पतरातू का समापन समारोह इस पूरी यात्रा का राजनीतिक और संगठनात्मक निष्कर्ष माना जा रहा है। झारखंड में युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल युवाओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। युवा राजद भी हूल दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर को सामाजिक चेतना और राजनीतिक संवाद के मंच में बदलने की कोशिश कर रहा है। यदि पार्टी इस आयोजन के माध्यम से युवाओं के बीच प्रभावी संदेश देने में सफल रहती है, तो यह उसके संगठन विस्तार और भविष्य की राजनीतिक सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पतरातू में आयोजित होने वाला यह समापन समारोह केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हूल दिवस की ऐतिहासिक विरासत को वर्तमान समय के सामाजिक न्याय, युवा नेतृत्व और लोकतांत्रिक भागीदारी के विमर्श से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि युवा राजद आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में युवाओं को केंद्र में रखकर अपनी भूमिका को और अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
