अरूण जेटली पर कीर्ति आजाद ने फिरोजशाह कोटला में घोटाले करने का लगाया था, आरोप के बदले में कीर्ति आजाद के राजनीतिक कैरियर को कर दिया बर्बाद

Jharkhand झारखण्ड देश बिहार

नयी दिल्ली से मुखर संवाद की रिपोर्ट

नयी दिल्ली: भारत में मरने के बाद सभी से सहानूभूति हो जाती है चाहे वह कितना भी बड़ा घोटालेबाज क्यों न हो। पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली को भी मरने के बाद भी दरभंगा के रहनेवाले सुभाष झा अब भी घोटालाबाज ही मानते हैं। सुभाष झा के अनुसार अरूण लजेटली के नाम पर दिल्ली का फिरोजशाह कोटला मैदान का नामाकरण होने जा रहरा है जहां वह घोटाले किया करते थे, लेकिन घोटाले का आरोप लगानेवाले कीर्ति आजाद का तो राजनीतिक कैरियर ही बदले की भावना होने के कारण बर्बाद कर दिया अरूण जेटली ने । सुभाष झा अब भी भाजपा के ही समर्थक है। यह बयान उन्होनंे मुखर संवाद से साझा की है। राजनीतिक करियर में भाजपा में रहने के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की कटु आलोचना करने वाले पूर्व सांसद कीर्ति झा आजाद ने जैसे ही अरुण जेटली के निधन की खबर सुनी, सुनकर वो उदास हो गए और उन्हें अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। लेकिन पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने ही कीर्ति आजाद के राजनीतिक कैरियर को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। अरूण जेटली पर कीर्ति आजाद ने दिल्ली क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में 300 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था जिसकी वो जांच की कमांग करते रहे लेकिन अरूण जेटली के सत्ता प्रभाव के कारण घोटाले की जांच नहीं हो सकी। अरूण जेटली के उपर 300 करोड़ के घोटाले का आरोप बतौर सबूत के साथ कीर्ति आजाद ने लगाया था लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नजदीकियां और सत्ता में रसूख के कारण किसी तरह की कोई जांच नहीं हो सकी। लेकिन दरभंगा के भाजपा समर्थक और कीर्ति आजाद के समर्थकों के अनुसार, -‘भगवान ने बिना जांच के ही सजा सुना दी‘। जिस दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान को लेकर अरूण जेटली के नाम पर किया जा रहा है उसी फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में घोटाले करने का आरोप भाजपा के ही सांसद कीर्ति आजाद ने लगाया था। कीति आजाद ने फिरोजशाह कोटला मैदान से ही संबंधित कार्य करने में अनियमितता का आरोप कीर्ति आजाद लगाते रहे। लेकिन किसी ने भी उनके आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया। कभी भाजपा का हिस्सा रहे कीर्ति आजाद और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच हमेशा से छत्तीस का आंकड़ा रहा । इसके लिए दिल्ली की क्रिकेट से ज्यादा बिहार की राजनीति जिम्मेदार रही है। क्रिकेट के मैदान में यह किसी से छिपा नहीं कि जैसे-जैसे अरुण जेटली का प्रभाव बढ़ा उसी अनुपात में कीर्ति आजाद हाशिये पर भी गए और कीर्ति आजाद की नाराजगी का कारण मात्र क्रिकेट नहीं बिहार की राजनीति भी रही है। हालांकि कोटला की पिच का अमूमन बिहार की राजनीति के मैदान से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए, लेकिन जेटली और कीर्ति के बीच जारी जंग में दोनों जगह समानांतर सह-मात का खेल चलता रहा। कभी जेटली जीते तो कभी कीर्ति ने उनकी नहीं चलने दी थी इसी को लेकर दोनों के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर मनमुटाव बना रहा। फिर निलंबन के बाद कीर्ति ने पार्टी छोड़ दी। डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के खुलासे का दावा करने वाले बीजेपी सांसद कीर्ति आजाद ने ट्वीट किया था कि मुझ पर मानहानि का केस क्यों नहीं कर रहे जेटली। कीर्ति आजाद ने ट्वीट में कहा कि अरुण जेटली ने मेरा नाम क्यों हटा दिया। आपने तो मेरे लेटर देखे थे, मुझ पर करो ना केस। रजिस्टर्ड पोस्ट से मैंने भेजे थे। दरअसल, जेटली कई आप नेताओं के खिलाफ मानहानि का केस दायर करने का दावा करते रहे हैं। भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा था कि ने कई फर्जी कंपनियों से करार कर करोड़ों रुपये दिए। किराये पर लिए गए सामान पर बड़ी फिजूलखर्ची की गई। यहां तक की डीडीसीए ने प्रिंटरों और कंप्‍यूटरों तक को भारी कीमत पर किराए पर लिया। कीर्ति आजाद ने दिल्ली क्रिकेट संघ में चल रही धांधली के खिलाफ मोर्चा खोला था । उन्होंने एक सीडी रिलीज करते हुए डीडीसीए में फ्रॉड बिलों की पोल खोली, हालांकि आजाद ने साफ किया था कि ये लड़ाई निजी रूप से किसी के खिलाफ नहीं है, लेकिन तमाम इशारे पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली पर सवाल उठाते रहे। आजाद ने पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी और पूर्व क्रिकेटर सुरिंदर खन्ना के साथ मिलकर ये मोर्चा खोला। इन सबने सीधे तौर पर तो किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन ये जरूर कहा कि किसी के नाक के नीचे ये भ्रष्टाचार हो और उसे पता ना हो ये कैसे हो सकता। डीडीसीए के कोषाध्यक्ष रविंदर मनचंदा ने माना कि डीडीसीए करप्शन से अछूता नहीं, लेकिन अरुण जेटली का इससे कोई लेना-देना नहीं रहा है। साफ है कि सिपाही बेइमान हो और सेनापति को इसका अंदाजा भी ना हो, ऐसा मुमकिन नहीं, लेकिन जेटली का नाम सीधे तौर पर सामने आने के लिए मामले को एक बड़ी और गंभीर जांच की जरूरत है।

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