

मुखर संवाद के लिये गोड़्डा से रंजीत यादव की रिपोर्टः-
गोड्डा/देवघर: केन्द्र की कृषि कानूनों के विरोध में कां्रगेस आज गोड्डा से देवघर तक ट्रैक्टर रैली का आयोजन करेगी। इस आयोजन का नेतृत्व गोड्डा में प्रदीप यादव करेंगे। वहीं देवघर में प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और कृषि मंत्री बादल पत्रलेख इसकी आगवानी करेंगे। केंद्र सरकार से कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर यह रैली निकाली जा रही है। इस आयोजन के संयोजक गोड्डा से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव की अगुआई में निकाली जा रही ट्रैक्टर रैली में कांग्रेसी दिग्गज जुटेंगे। वहीं देवघर में कृषि मंत्री बादल पत्रलेख करेंगें रैली की आगवानी। यह रैली गोड्डा में कारगिल चैक से होते हुए देवघर के रोहिणी शहीद स्थल तक निकाली जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि लोकतांत्रिक तरीके से की जा रही इस रैली में शांतिपूर्ण ढंग से देशहित में केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की जाएगी। इस रैली की गूंज झारखंड से दिल्ली तक सुनी जाएगी। आगे कांग्रेस प्रदेश के पांचों प्रमंडल में ट्रैक्टर रैली करेगी।
कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि गांधीवादी तरीके से पूरी मजबूती से केंद्र सरकार के कानों तक कृषि कानून वापसी की आवाज पहुंचाई जा रही है। ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने हक-हुकूक की आवाज बुलंदी से उठा सके।आज की ट्रैक्टर रैली में झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, कांग्रेस के तमाम विधायक और गठबंधन दल के नेता शामिल होंगे। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में यह ट्रैक्टर रैली निकाली जा रही है। इसमें हर जिले से किसानों को बुलाया गया है।कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने 26 जनवरी को दिल्ली में किसान आंदोलन के क्रम में निकाली गई ट्रैक्टर रैली और लाल किले पर झंडा फहराने की घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट को स्वतरू संज्ञान लेकर पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने केंद्र सरकार और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लोकसभा में पूरे मामले पर बहस की मांग की। बादल पत्रलेख दिल्ली में किसानों की रैली का समर्थन करने के साथ ही कल पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात कर उनको समर्थन देने पहुचंे थसे। बादल पत्रलेख ने कहा है कि किसानों के हित में जब तक केंन्द्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेता तबतक उनका आंदोलन और विरोध जारी रहेगा।
