
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची : गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः मंत्र के साथ सरला बिरला विश्वविद्यालय में भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की 160वीं जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर गोपाल पाठक ने की। मौके पर कुलपति प्रोफ़ेसर गोपाल पाठक ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी, शिक्षा दीक्षा तथा जीवन दर्शन के बारे में अपने विचार साझा किये। उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य एक पेशा नहीं बल्कि जीवन शैली है। शिक्षक समाज के लिए न केवल महत्वपूर्ण बल्कि समाज का सबसे सम्मानित व्यक्ति होता है। उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक ही अपने धर्म एवम आचरण से भारत को विश्व गुरु बना सकता है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर विजय कुमार सिंह ने कहा कि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जीवन में शिक्षक से लेकर कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वाह किया लेकिन वे सदैव अपने आप को एक शिक्षक के रूप में ही मान्यता दी।
भारतीय गुरु शिष्य परंपरा की चर्चा करते हुए तथा पौराणिक दृष्टांतों का उदाहरण देकर उन्होंने यह बताया कि चाणक्य की तरह एक शिक्षक कैसे किसी योग्य को योग्यतम के रूप में तैयार कर सकता है। कार्यक्रम में प्रो मनोरमा पटनायक, मिनाल श्वेता, प्रो अनुषा लाल, डॉ स्वाति लेखा महतो एवं प्रो आरोही आनंद ने शिक्षक दिवस के बारे में अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो आरोही आनंद ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ नीतू सिंघी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी डीन, एसोसिएट डीन, प्राध्यापकगण तथा कर्मचारीवृंद उपस्थित थे। यह जानकारी सरला बिरला विश्वविद्यालय के कार्मिक प्रबंधक अजय कुमार ने दी।
