

रांची से अशोक कुमार
रांची: तब्लीगी जमात पूरी दुनिया में इस्लाम के फैलाव का प्रचारक के रूप में सामने आया लेकिन अब यह तब्लीगी जमात देश में कोरोना जैसे गंभीर संक्रमण को बांट रहा है। रांची के हिन्दपीढ़ी में जिन 22 मुस्लिम धर्म प्रचारकों को बड़ी मस्जिद से पकड़ा गया था उनमें से एक मरीज कोरोना संक्रमित निकली। एक महिला में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। कोरोना वायरस के मरीज की पुष्टि होने के बाद पूरे झारखंड में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य महकमा हाई अलर्ट पर आ गया है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में मस्जिद से पकड़ी गई मलेशिया की मुस्लिम महिला में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की है। झारखंड की राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में बीते दिन बड़ी मस्जिद से 18 विदेशी मौलवियों को पकड़ा गया था, जिसमें कोरोना वायरस से संक्रमित महिला भी शामिल थी। यह महिला तब्लीगी जमात से जुड़ी है। दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर यह महिला इस हफ्ते ही यहां लौटी है। कोरोना से संक्रमित मलेशिया की यह महिला मौलवी तब्लीगी जमात मरकज से जुड़ी बताई गई है।इस विदेशी महिला को मस्जिद से पकड़े जाने के बाद रांची के खेलगांव में क्वारंटाइन कर रखा गया था। अब लगातार दो बार जांच में कोरोना वायरस के पॉजिटिव पाए जाने के बाद इसे रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। इस महिला की ट्रैवल हिस्ट्री निकाली जा रही है। मलेशिया की यह महिला तब्लीगी जमात की है।
कोरोना वायरस महामारी के भारत में व्यापक फैलाव के बीच दिल्ली में निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में रांची के 46 स्कॉलर शामिल हुए थे। मंगलवार को कोराना से संक्रमित मुस्लिम स्कॉलरों के पकड़े जाने के बाद दिल्ली में जो खुलासा हुआ है, उसके मुताबिक इस जमात में शामिल देश के 1830 स्कॉलरों में 46 ने अपना पता रांची ही लिखवाया है। इनमें से मलेशिया की महिला में कोरोना वायरस की पुष्टि हो गई है। पुलिस ने बीते दिन इस महिला मौलवी को राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में बड़ी मस्जिद से पकड़ा था।
मलेशिया की रहने वाली महिला में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मिलने के बाद पूरे झारखंड में हड़कंप मच गया है। बीते दिन रांची के हिंदपीढ़ी इलाके के बड़ी मस्जिद से तब्लीगी जमात के 18 विदेशी मौलवियों को पकड़ा गया था, जिसमें मलेशिया की यह मुस्लिम महिला भी शामिल थी। पुलिस ने इन सभी को पकड़ने के बाद हिरासत में लेकर रांची के खेलगांव में क्वारंटाइन किया था। मंगलवार को महिला में कोरोना वायरस की पुष्टि होने के बाद उसे रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। कोरोना के संक्रमण में बड़ी भूमिका निभाने वाले दिल्ली निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में बोकारो के तीन लोग भी शामिल हुए थे।
पूरे देश की नजर इस झारखंड के रूप में प्रकृति वन प्रदेश पर टिकी है। जब लगभग पूरा भारत कोरोना की चपेट मे हैं लेकिन प्राकृतिक संसाधनों से भरे-पूरे इस राज्य में अब तक एक भी केस पॉजिटीव नहीं मिला। डॉक्टर से लेकर वैज्ञानिकों तक इसकी पड़ताल भी की जा रही है। माना जा रहा है कि झारखंड मलेरिया जोन रहा है, ऐसे में यहां के लोगों के शरीर में कोरोना से लड़ने का रेजिस्टेंस डेवपल हो गया हो। क्योंकि कोरोना की अभी जो दवाई दी जा रही वह मलेरिया में भी दी जाती है। इधर आंकड़ों की बात करें तो कोरोना के पॉजीटिव केस नहीं मिलने के पीछे बड़ा कारण यह है कि राज्य में कोरोना संदिग्धों की जांच काफी कम हुई हैं। जबकि दूसरे राज्यों महाराष्ट्र, दिल्ली, केरल, तेलंगना आदि के मुकाबले झारखंड से विदेशों में आवाजाही कम है। इस बीच और राज्यों के मुकाबले झारखंड सरकार ने बिना केस मिले और बिना देर किए सही समय पर लाॅक डाउन कर दिया है। वहीं क केन्द्रीय खुफिया विभाग की सूचना पर कल शाम दो लोगों को पकड़ा गया वहीं तीसरे की पहचान मंगलवार को हुई। तीनों के ब्लड सैंपल को आज स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। उसे जांच के लिए रांची भेज दिया गया। दो लोग चंदनकयिारी तथा 1 चास प्रखंड के हैं। विदित हो कि 13 से 15 मार्च के बीच दिल्ली में तब्लीगी जमात का आयोजन किया गया था। उसमें तब्लीगी जमात के बोकारो के तीन प्रतिनिधि शामिल हुए थे। वहीं 22 फरवरी को दिल्ली से बोकारो आए 14 तब्बलीगी जमात के लोगों को भी होम क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है। ये लोग 40 दिन के लिए बोकारो दौरे पर आए थे। इस बीच लॉक डाउन की घोषणा हो गई। इन पर प्रशासन की नजर है। ये सभी मौलवी हैं।बताया जा रहा है कि जमात में शामिल होने के बाद ये लोग पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में छिप गए हैं। जिनकी तलाश तेज कर दी गई है। इधर खुफिया विभाग और केंद्रीय जांच एजेंसियां तब्लीगी जमात मरकज के आतंकी कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है। यह पता चला है कि कोरोना वायरस को आतंकी बॉयोलॉजिकल हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह काफी खतरनाक होगा। बहरहाल अब तक रांची के दो मस्जिदों से कुल 29 विदेशी मौलवी पकड़े जा चुके हैं। इस बारे में खुफिया विभाग पड़ताल में जुटी है। इधर पुलिस की ओर से ऐसे विदेशियों के मस्जिदों में बिना जानकारी के छुपे रहने को लेकर रांची को सुरक्षित पनाहगाह मानने की दिशा में भी जांच की जा रही है। राजधानी रांची के नाम पर जमात में शामिल होनेवालों की संख्या 46 है जिन्हें ढ़ूढ़ने की जिम्मेवारी झारखंड सरकार पर है। यह जिम्मेवारी हेमंत सरकार के लिये एक चुनौती के समान है।
