मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
रांची: केंद्र सरकार ने लॉकडाउन काल में भी प्रवासियों को अपने गांव- घर जाने की अनुमति दे दी है। बुधवार को दिशानिर्देश जारी कर इसका खाका भी बना दिया है। यानी अलग अलग राज्यों मे फंसे मजदूर, छात्र, तीर्थयात्री, पर्यटक सड़क मार्ग से अपने घर लौट सकते हैं। लेकिन इसके लिए राज्यों के बीच आपसी सहमति होनी चाहिए और नोडल अधिकारी के जरिए ऐसे यात्रियों और समूहों को एक राज्य से भेजा जाएगा और दूसरे राज्य में उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। झारखंड सरकार ने भी छात्रों और मजदूरों को राज्य के बाहर से लाने के लिये एक कमेटी का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि छात्रों और मजदूरों को लाने के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार की शाम गाइड लाइन जारी कर दिया है। इससे पूर्व झारखंड की राय जानने के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान ने भी उनसे बातचीत की थी। केंद्र का गाइड लाइन कई शर्तों के साथ है। अब उस गाइड लाइन के आलोक में छात्रों-मजदूरों को लाने का झारखंड में कायदा-कानून बनाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने आज ही पदाधिकारियों की एक कमेटी बना दी है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पास सीमित संसाधन है। वह अकेले दम पर छात्रों-मजदूरों को लाने में सक्षम नहीं है। इसमें हमें केंद्र से सहयोग अपेक्षित है। क्योंकि झारखंड के पास ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन भी नहीं है। जो संसाधन है, उसमें झारखंड को लगभग पांच लाख मजदूर और छात्रों को लाने में ही छह माह गुजर जाएंगे। इसलिए अधिकारियों की यह कमेटी पूरा वर्क प्लान तैयार करेगी। उसी अनुरूप हम आगे निर्णय लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहर फंसे छात्रों के अभिभावक अपने बच्चों को लाने की लगातार गुहार लगा रहे हैं। सरकार उन्हें अपने बच्चों को लाने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। कमेटी का गठन होने के बाद अब झारखंड सरकार अपने अधिकारियों की कमेटी के जरिये आनेवाली रणनीति पर विचार करेगी जिसे छात्रों और मजदूरों को राज्य से बाहर लाया जा सके।
