
मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
पटना : बिहार की राजनीति में यह सवाल लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद राज्य की सत्ता की कमान किस नेता के हाथों में जाएगी। लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के बाद संभावित उत्तराधिकारी को लेकर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के बीच अटकलें तेज हो गई हैं। बिहार की राजनीति में एक युग का अंत हो रहा है और नए दौर की शुरुआत हो रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब पटना की गद्दी छोड़कर दिल्ली यानी केंद्र की राजनीति में जाने का मन बना लिया है। उन्होंने राज्यसभा के लिए अपना पर्चा भर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब बिहार में सत्ता की चाबी पहली बार पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के हाथों में आने वाली है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? बीजेपी अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है। इस बार जो नाम चर्चा में हैं, उन्होंने सबको हैरान कर दिया है. सीएम की इस रेस में चार दिग्गज नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं- सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, नित्यानंद राय और संजीव चौरसिया. ये चारों नेता ओबीसी समुदाय से आते हैं.बिहार की राजनीति में जाति फैक्टर हमेशा से हावी रहा है. सम्राट चौधरी कोइरी समाज से आते हैं. इनका राज्य में बड़ा वोटबैंक है। नित्यानंद राय यादव समुदाय से हैं। यह बिहार की सबसे बड़ी आबादी वाला पिछड़ा वर्ग है। दिलीप जायसवाल कलवार और संजीव चौरसिया वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बीजेपी को पता है कि नीतीश कुमार के जाने के बाद उनके लव-कुश समीकरण और अति-पिछड़ा वोटबैंक को अपनी ओर खींचना जरूरी है। इसी से पार्टी का विस्तार हो पाएगा। अगर पार्टी किसी सवर्ण को मुख्यमंत्री बनाती है, तो विपक्षी दल इसे पिछड़ा विरोधी बताकर मुद्दा बना सकते हैं। इसीलिए, बीजेपी अपनी सवर्ण पार्टी वाली छवि को तोड़कर पिछड़ों और अति-पिछड़ों के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।
बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के बाद राज्य की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी, इस पर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर नए मुख्यमंत्री के संभावित चेहरे को लेकर कई नाम सामने आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद की दौड़ में चार प्रमुख नेताओं के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। संगठन और सरकार दोनों स्तर पर उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी के भीतर उनका प्रभाव बढ़ा है।
इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने के कारण उन्हें भी महत्वपूर्ण दावेदार माना जा रहा है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल तथा दीघा के विधायक संजीव चौरसिया भी संभावित चेहरों में शामिल बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला ले सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम निर्णय एनडीए विधायक दल की बैठक और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल बिहार की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है और सभी की निगाहें पार्टी के अगले कदम पर टिकी हैं।
