मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची : बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद ने प्रश्न करते हुए यह कहा था कि पूरे देश में आरक्षण संबंधी मात्र तमिलनाडु राज्य का विधेयक को नौंवी अनुसूची में 90 के दशक में रखा गया था और उसके बाद इस प्रकार के आरक्षण विधेयक को नौवीं अनुसूची में जगह नहीं मिली है। अंबा प्रसाद के पूछे गए प्रश्न पर सरकार ने बताया कि तमिलनाडु राज्य के द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर आरक्षण संबंधित मामले को 76 वे संविधान (संशोधन) अधिनियम 1994 द्वारा संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण जल्द सुनिश्चित करने के लिए कराया जाए जाति आधारित जनगणना की भी मांग की है अंबा प्रसाद ने। ,’आरक्षण के मामले पर सिर्फ तमिलनाडु राज्य के प्रस्ताव को नौंवी अनुसूची में किया गया है शामिल, जातीय जनगणना कराना अति आवश्यकबताया है।
विधायक अंबा प्रसाद ने इस अवसर पर कहा कि ओबीसी आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पारित विधेयक जिसे माननीय राज्यपाल के पास नौवीं अनुसूची में शामिल करने के उद्देश्य से भेजा गया है उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए जाति आधारित जनगणना अति आवश्यक है। झारखंड राज्य के आरक्षण संबंधी मामला को भी संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के मामले पर देरी हो रही है। इसीलिए ओबीसी समुदाय का 27प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित कराने के लिए जाति आधारित जनगणना पूरे राज्य में कराया जाए ताकि उक्त विधेयक नौवी अनुसूची में जल्द से जल्द शामिल हो अथवा नौवीं अनुसूची में शामिल ना होने की स्थिति में माननीय उच्च व सर्वोच्च न्यायालय से इसकी स्वीकृति करायी जा सके।
