

भाजपा ने जदयू के पीठ में खंजर घोंपा, अरूणाचल प्रदेश में जदयू के छह विधायकों को बीजेपी में कराया शामिल, नीतिश कुमार के तेवर तल्ख
ईटानगर से प्रेमा नारंग की रिपोर्टः-
ईटानगर: बिहार में नीतिश सरकार में शामिल जदयू की पीठ में खंजर घोंपने का काम बीजेपी ने किया है। यह आरोप आरजेडी के नेता लगा रहे हैं। आरजेडी के प्रवक्ता मृत्यूंजय तिवारी ने कहा है कि बीजेपी अपने सहयोगी दलों से कितना लगाव रखती है यह ईटानगर में जदयू के छह विधायकों को बीजेपी में शामिल कराकर जता दिया है। यह पीठ में छूरा घोंपने जैसा ही है। एक ओर बिहार में सत्ता का स्वाद साथ में बीजेपी जदयू के साथ चख रही है तो दूसरी ओर अरूणाचल में जदयू को ही तोड़कर बीजेपी अपनी संख्या बल बढ़ा रही है। अरुणाचल प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड के 6 विधायकों के भारतीय जनता पार्टी में जाने से बिहार की राजनीति में भी उथल-पुथल मचने के आसार हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बॉडी लैंग्वेज से तो यही लग रहा है। नीतीश शुक्रवार को जब मीडिया से मुखातिब हुए, तो उनका अंदाज कुछ इस तरह का था, जैसे कह रहें हो – पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त। नीतीश ने कहा कि वे लोग चले गए हैं, लेकिन हमारी बैठक अभी बाकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार एक-दो दिन में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। नीतीश के इस बयान को बिहार की राजनीति में आने वाले भूचाल के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नीतीश कुमार की जदयू ने अरुणाचल प्रदेश में सात विधानसभा सीटें जीत सबको अचरज में डाल दिया था। लेकिन, अब उसकी सहयोगी बीजेपी ने छह विधायकों को तोड़कर नीतीश को चैंका दिया है। यह तीसरा मौका है, जब बीजेपी ने सीधे तौर पर जदयू को झटका दिया है। इससे पहले भी 2019 से लेकर 2020 तक केंद्र, बिहार और अब अरुणाचल प्रदेश में जदयू को मात खानी पड़ी है। शुरुआत लोकसभा चुनाव 2019 से हुई थी। जदयू 16 सीटें जीतकर केंद्र में गया, लेकिन मनमुताबिक मंत्रालय नहीं मिलने से उसे बैरंग ही लौटना पड़ा था। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में छक्। के सभी घटक दल एक साथ लड़ रहे थे। लेकिन, लोजपा गठबंधन से बाहर निकलकर जदयू के खिलाफ चुनाव लड़ी। इसका भारी नुकसान जदयू को उठाना पड़ा। इस दौरान बीजेपी ने चुप्पी साध ली थी। अरुणाचल विधानसभा में जदयू दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। प्रदेश प्रभारी अशफाक अहमद खान ने बताया कि छह में से तीन विधायकों पर पहले ही कार्रवाई की गई थी। हालांकि, विधायक दल के नेता अभी भी जदयू के साथ हैं। इस बीच, यह तोड़-फोड़ तब हुई, जब पटना में 26-27 दिसंबर को जदयू राष्ट्रीय बैठक और कार्यकारिणी की बैठक कर रहा है। इसमें उन विधायकों को भी शामिल होना था। हालांकि, नीतीश कुमार शांत बैठने वालों में से नही हैं। इसका नतीजा आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। बीजेपी और जदयू के संबंधों में अरूणाचल प्रदेष की घटना से खटास आने की संभावना दिखाई देने लगी है।
