लोहरदगा से लोकेश केशरी की रिपोर्टः-
लोहरदगा: लोहरदगा के लोगों ने कई दिनों के बाद आज सकुन की सांस ली है। कर्फ्यू के दौरान आमलोगों का जीना कैसे दूभर हो जाता है यह लोहरदगा के लोग ही जानते हैं। लोहरदगा के गिरजाशंकर मिश्रा बताते हैं कि कर्फ्यू के दौरान अपपने मित्रों और सगे संबंधियों से मिलना दुश्वार हो गया था और जीवन बोझिल लगने लगा था। लोहरदगा के सभी क्षेत्रों से गुरुवार सुबह पांच बजे से कर्फ्यू हटा दिया गया है। हालांकि निषेधाज्ञा को अगले आदेश तक जारी रखा गया है। 23 जनवरी को सीएए के समर्थन में निकले शांति मार्च में पथराव के बाद हालात बिगड़ गए थे। इसके बाद जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया था। हालात को सामान्य करने के लिए रोजाना कुछ घंटे की ढील दी जा रही थी।हालात बिगड़ने के बाद 24, 25, 26 और 28 जनवरी को कर्फ्यू में ढील नहीं दी गई थी। 27 जनवरी को दो घंटे, 29 जनवरी को दो-दो घंटे की दो पाली में ढील, 30 जनवरी को तीन-तीन घंटे की दो पाली में ढील, 31 जनवरी को साढ़े तीन-साढ़े तीन घंटे की दो पाली में ढील, 01 फरवरी को दो पालियों में सात घंटे की ढील, 02,03, 04,05 फरवरी को सुबह छह से शाम छह बजे तक 12 घंटे की ढील दी गई। सीएए के समर्थन में हुए पथराव के बाद से लगाए गए कर्फ्यू के बीच लोहरदगा जिला को लगभग 400 करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक नुकसान बैंकिंग कार्यों और बॉक्साइट ट्रकों के बंद रहने से हुआ है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों के व्यवसायों में भी करोड़ों का नुकसान पहुंचा है। किराना व्यवसायियों ने बताया कि 23 जनवरी से 26 जनवरी तक जिले में संचालित लगभग 700 दुकानों को एक करोड़ 20 लाख रुपए का प्रभाव पड़ा है। इसके बाद से अबतक मिले ढील के बीच किराना व्यवसाय अन्य दिनों के मुताबिक दोगुना रहा। यानि अन्य दिनों में जहां एक दिन में 30 से 32 लाख का कारोबार होता था। वहां सीधे 50 से 60 लाख का व्यवसाय हुआ है। लोहरदगा जिला ट्रक ऑनर एसोसिएशन के अध्यक्ष कंवलजीत सिंह ने बताया कि कर्फ्यू के दौरान जिले में प्रतिदिन एक बॉक्साइट ट्रक से जुड़े लोगों को 10 हजार का नुकसान हुआ है। इस तरह जिले में चलने वाली लगभग 1200 बॉक्साइट ट्रकों को 10 दिनों में 12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
