
रांची: झारखंड का सबसे बड़ा और ताकतवर परिवार सोरेने परिवार पर कानून का शिकंजा कसनेवाला है। सोरेन परिवार झारखंड विधानसभा चुनाव में मुश्किलांे में पड़ सकता है। सोरेन परिवार की ओर से बेतहाशा जमीन खरीदने की शिकायत को लेकर रघुवर सरकार की ओर से कार्रवाई शुरू हो गयी है। ऐन विधानसभा चुनाव के पहले जमीन खरीदने का मामला राजनीतिक गलियारों के साथ झारखंड की जनता के बीच भी सुर्खियों में आ सकता है। शिबू सोरेन परिवार द्वारा सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर रांची, धनबाद और बोकारो में जमीन खरीदने के आरोपों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। तीनों जिलों के अपर समाहर्ता ने जमीन खरीदने और बेचने वालों को नोटिस जारी किया है। उन्हें अपना पक्ष रखने को कहा गया है। आरोप है कि इन तीनों जिलों के 16 थाना क्षेत्रों में ऐसे जमीन खरीद के 28 मामले हैं। यह कार्रवाई भाजपा के राज्यसभा सदस्य समीर उरांव, विधायक रामकुमार पाहन आदि की शिकायत पर की गई है। इन्होंने 21 अक्टूबर को मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। मुख्य सचिव ने भू-राजस्व विभाग को कार्रवाई का आदेश दिया। फिर 22 अक्टूबर को भू-राजस्व के संयुक्त सचिव सुनील कुमार सिंह ने रांची, धनबाद व बोकारो डीसी को कार्रवाई के लिए लिखा था। इससे पहले 20 मई को विधायक रामकुमार पाहन ने दक्षिणी छोटानागपुर के आयुक्त को पत्र लिखा था। इसमें रांची के अरगोड़ा मौजा से संबंधित एक मामले में जांच कराकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इस पर महाधिवक्ता से परामर्श लिया गया था। 22 अक्टूबर को भू राजस्व विभाग को भेजे पत्र में महाधिवक्ता के परामर्श की काॅपी भी लगाई गई है। महाधिवक्ता अजीत कुमार ने अपने परामर्श में कहा था कि रांची के अरगोड़ा में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर जमीन खरीदी गई है। जमीन से संबंधित दस्तावेज में दावा किया गया है कि खरीदार संथाल जनजाति के हैं और हरमू काॅलोनी के निवासी हैं। इससे न सिर्फ सीएनटी एक्ट का उल्लंघन हुआ है, बल्कि गलत जानकारी भी दी गई है। सीएनटी एक्ट को लेकर अबतक सोरेन परिवार पर कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच चर्चा बना हुआ है।
