सरकारी नौकरी की बात कहकर दलित हत्या को बढ़ावा दे रहे हैं नीतीशः- तेजस्वी यादव, तेजस्वी का जवाब नीतिश के बजाय मांझाी दे रहे

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पटना से मनोहर यादव की रिपोर्टः-
पटनाः बिहार में दलित राजनीति पर सियासी बवंडर उठा हुआ है। नया मुल्ला ज्यादा प्याज खाता है। वहीं कुछ इन दिनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझाी नीतिशु कुमार की चापलूसी मंे बयान दे रहे हैं। कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दलित की हत्या होने पर पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान लागू करने का निर्देश दिया। इस पर शनिवार को तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार दलितों की हत्या को बढ़ावा दे रहे हैं। इस बयान के बाद हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी ने तेजस्वी को कानून पढ़ने की नसीहत दे डाली। तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री को तो ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे दलितों की हत्या ही ना हो। आप कौन से कानून बना रहे हैं? आप दलितों की हत्या को प्रमोट कर रहे हैं। इस कानून से दलितों की हत्या ज्यादा होगी। पहले ही बिहार में अपराध चरम पर है। हर चार घंटे बाद बिहार में एक रेप होता है और नीतीश कुमार कहते हैं कि बेटियां सुरक्षित हैं। हम पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि जो लोग दलित की हत्या होने पर आश्रित को सरकारी नौकरी के प्रावधान पर सवाल उठा रहे हैं उन्हें पहले कानून पढ़ लेना चाहिए। एससीध्एसटी एक्ट 1989 में बना और 1995 में लागू हुआ था। इसमें कई संशोधन हुए हैं, लेकिन मूल रूम में उसका जो सेक्शन 325 है उसमें किसी दलित की हत्या होने पर सजा का प्रावधान है। इसके साथ पीड़ित को पेंशन के अलावा रोजगार देना है। रोजगार में सरकारी नौकरी है, लाइसेंस देना है या फिर खेती योग्य जमीन खरीदकर देना है। बच्चों को आवासीय विद्यालय में पढ़ाना है। यह केंद्र सरकार का कानून है। किसी को इस पर शक है तो वह सेंट्रल के लोगों से बात कर ले। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्यस्तरीय सतर्कता व मानीटरिंग कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री ने हत्या होने पर पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी देने के लिए तत्काल कानून बनाने को कहा था। मैं इसके लिए उनको धन्यवाद देता हूं। जो लोग इस पर सवाल उठाते हैं उनको कानून का ज्ञान नहीं है।

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