
मुखर संवाद के लिये अशोक कुमार की रिपोर्टः-
पटना- समाजवाद कहने के लिये समाज में सभी को अधिकार और समान वितरण की वकालत करता है। लेकिन समाजवादी नेताओं को परिवारवाद ही भाता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को अपने पुत्रमोह में फंसना ही पड़ा। अधिकतर समाजवादी नेता पुत्र और परिवार के चक्कर में कार्यकर्ताओं की बलि ले ही लेते हैं। कार्यकर्ताओं के अधिकार को उनके परिवार के पैरों में दब ही जाना पड़ता है। अब नीतिश कुमार के बेटे निशांत भी जदयू की बागडोर संभालकर उसी तरह का संदेश देंगें। सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 8 मार्च से एक्टिव पॉलिटिक्स में अपना सफर शुरू करेंगे. जेडीयू ज्वाइन करने के बाद वे पिता सीएम नीतीश की तरह ही बिहार की यात्रा पर निकलेंग। निशांत कुमार पूरे बिहार का दौरा करेंगे और लोगों से बातचीत भी करेंगे। सीएम नीतीश कुमार बिहार और देश के इकलौते ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपने राज्य की 16 बार यात्राएं कीं। इसके साथ ही विकास कार्यों का जायजा लिया। जीविका की स्थापना की और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई पहल किए। जीविका दीदियों की सलाह पर ही शराबबंदी जैसा ऐतिहासिक फैसला लिया था. ऐसे में अब निशांत कुमार भी अपने पिता की तरह ही बिहार की यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं।
जेडीयू नेताओं का मानना है कि जेडीयू के 84 विधायक और 12 से ज्यादा सांसदों के नेता के रूप में निशांत उभरकर सामने आयेंगे। निशांत ने सक्रिय राजनीति में उतरने की हामी भी भर दी है, इससे पार्टी में खुशी देखी जा रही है। दरअसल, निशांत कुमार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कॉपी के तौर पर देखा जा रहा है। वे स्वभाव से शांत, गंभीर, धार्मिक और सादा जीवन जीने वाले और लो प्रोफाइल के हैं। कई समारोहों में यह दिख भी चुका है.।इस कारण निशांत कुमार में लोगों को नीतीश कुमार छवि दिखती है और लोग उनको एक नए लीडर के रूप में देख रहे हैं।
निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पटना के सेंट कैरेंस स्कूल और केंद्रीय विद्यालय से हुई। 12वीं की पढ़ाई मसूरी के मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से की. इसके बाद बीआईटी मेसरा, रांची से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री ली। निशांत को एक शांत और ‘लो-प्रोफाइल’ व्यक्ति माना जाता है। उनकी रुचि अध्यात्म में रही है और वे लंबे समय तक एक्टिव पॉलिटिक्स और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहे हैं।
