

मुखर संवाद के लिये निशि की रिपोर्ट
नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के देवघर में श्रावणी मेले के आयोजन की मंजूरी देने से इंकार कर दिया है। हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया है कि झारखंड सरकार लॉकडाउन में छूट को देखते हुए धार्मिक स्थलों को खोलने पर विचार कर सकती है, लेकिन इसके लिए सामाजिक दूरी और अन्य दिशा-निर्देशों का ध्यान रखने की जरूरत है। न्यायाधीश अरुण मिश्रा, न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश कृष्ण मुरारी की खंडपीठ झारखंड हाइकोर्ट द्वारा मेले का आयोजन नहीं कराने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की है।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए बैद्यनाथ धाम में वार्षिक मेले के आयोजन की इजाजत देने की मांग करते हुए हाइकोर्ट के वर्चुअल दर्शन के फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता निशिकांत दुबे के वकील समीर मलिक ने खंडपीठ को कहा कि 30 हजार पुजारियों को मंदिर जाने की इजाजत है, लेकिन भक्तों को नहीं। इस पर न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने कहा कि ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है और झारखंड सरकार के वकील सलमान खुर्शीद से आधे घंटे में इसका जवाब देने को कहा। न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि ई-दर्शन और वास्तविक दर्शन में अंतर है। इस पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी धार्मिक स्थलों को बंद करने का फैसला लिया है और बढ़ते मामलों को देखते हुए मंदिर के खोलने का कोई सवाल नहीं है। खुर्शीद ने खंडपीठ को बताया कि राज्य में 31 अगस्त तक लॉकडाउन है और मेला के दो दिन पहले पूर्व के आदेश को निरस्त करने से अफरा-तफरी मच सकती है। इस फैसले से सांसद निशिकांत दूबे के चुनौती को झटका लगा है।
