रांची जिले के सिल्ली के पिस्का गांव में झुका बिजली पोल बना खतरा, कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना

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मुखर संवाद के लिये सुमित कुमार की रिपोर्टः-
रांची: रांची जिले के सिल्ली थाना क्षेत्र अंतर्गत पिस्का गांव में खेत के बीच झुका हुआ 11 हजार वोल्ट बिजली लाइन का पोल ग्रामीणों और किसानों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। आंधी, तूफान और लगातार हुई बारिश के कारण बिजली का पोल कई दिनों से एक तरफ झुक गया है, लेकिन बिजली विभाग अब तक इस गंभीर समस्या को लेकर मौन बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पोल को नहीं हटाया गया या उसे मजबूती से नहीं लगाया गया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। जानकारी के अनुसार पिस्का गांव के खेतों के बीच से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजरती है। हाल के दिनों में तेज आंधी और बारिश के बाद बिजली का पोल काफी झुक गया है। पोल झुकने के बावजूद लाइन में लगातार बिजली आपूर्ति चालू है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। खेतों में प्रतिदिन किसान खेती-बाड़ी का काम करते हैं, वहीं कई ग्रामीण अपने गाय-बकरी भी चराने के लिए उसी क्षेत्र में जाते हैं। ऐसे में यदि पोल अचानक गिर जाता है या तार टूटकर जमीन पर आ गिरते हैं तो बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। लोगों का कहना है कि पोल को खेत में केवल कच्ची मिट्टी में गाड़ दिया गया था, जबकि गुणवत्ता के अनुसार गिट्टी, सीमेंट और मसाला देकर मजबूत तरीके से जाम करना जरूरी था। घटिया तरीके से लगाए गए पोल के कारण ही बारिश और तेज हवा में वह झुक गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग को कई बार इसकी सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि विभाग सबकुछ जानते हुए भी समस्या को नजरअंदाज कर रहा है। गांव के लोगों ने कहा कि बिजली विभाग की यह लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। किसानों ने प्रशासन और बिजली विभाग से जल्द से जल्द पोल को दुरुस्त करने तथा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में खतरा और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि खेतों में पानी भर जाने से करंट फैलने की आशंका बनी रहती है। यदि कोई पशु या व्यक्ति इसकी चपेट में आ गया तो गंभीर हादसा हो सकता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह है कि बिजली विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए कब तक कार्रवाई करता है।

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